तीस चौबीसी का अर्घ्य
द्रव्य आठों जु लीना है, अर्घ्य कर में नवीना है। पूजतां पाप छीना है, ‘भानुमल’ जोर कीना है।। द्वीप अढ़ार्इ सरस राजै, क्षेत्र दश ता-विषै छाजें। सात शत बीस जिनराजै, पूजतां पाप सब भाजें।। ॐ ह्रीं पंचभरत, पंचऐरावत, दशक्षेत्रव...
पूजतां पाप छीना है, ‘भानुमल’ जोर कीना है।।
द्वीप अढ़ार्इ सरस राजै, क्षेत्र दश ता-विषै छाजें।
सात शत बीस जिनराजै, पूजतां पाप सब भाजें।।
ॐ ह्रीं पंचभरत, पंचऐरावत, दशक्षेत्रविषयेषु त्रिंशति चतुर्विंशतीनां विंशति अधिकसप्तशत तीर्थंकरेभ्य: नम: अर्घ्यं निर्वपामीति स्वाहा |
अथवा,
ॐ ह्रीं पाँचभरत, पाँचऐरावत, दस क्षेत्र संबंधी तीस चौबीसियों के सात सौ बीस तीर्थंकरेभ्य: नमः अर्घ्यं निर्वपामीति स्वाहा।