पूजा संग्रह · Mixed · Devanagari

भजन : नाथ! तोरी पूजा को फल पायो

कवि श्री देवेन्द्रकीर्ति नाथ! तोरी पूजा को फल पायो, मेरे यों निश्चय अब आयो| नाथ! तोरी पूजा को फल पायो| मेंढक कमल-पाँखड़ी मुख ले, जिन-दर्शन को धायो, श्रेणिक-गज के पग-तल मूवो, तुरत स्वर्गपद पायो| नाथ! तोरी पूजा को फल पायो|...

कवि श्री देवेन्द्रकीर्ति
नाथ! तोरी पूजा को फल पायो,
मेरे यों निश्चय अब आयो|
नाथ! तोरी पूजा को फल पायो|
मेंढक कमल-पाँखड़ी मुख ले,
जिन-दर्शन को धायो,
श्रेणिक-गज के पग-तल मूवो,
तुरत स्वर्गपद पायो|
नाथ! तोरी पूजा को फल पायो|
मैनासुन्दरि शुभ-मन सेती,
सिद्धचक्र-गुण गायो,
अपने पति को कोढ़ नशायो,
गंधोदक-फल पायो|
नाथ! तोरी पूजा को फल पायो|
अष्टापद में भरत-नरेश्वर,
आदिनाथ मन लायो,
अष्टद्रव्य से पूजा कीनी,
अवधिज्ञान दरशायो|
नाथ! तोरी पूजा को फल पायो|
अंजन से सब पापी तारे,
मेरो मन हुलसायो,
महिमा मोटी नाथ तुम्हारी,
मुक्तिपुरी सुख पायो|
नाथ! तोरी पूजा को फल पायो|
थकि थकि हारे सुरपति-नरपति,
आगम सीख जतायो,
‘देवेन्द्रकीर्ति’ गुरु ज्ञान मनोहर,
पूजा ज्ञान बतायो|
नाथ! तोरी पूजा को फल पायो|
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