पूजा संग्रह · Mixed · Devanagari

संक्षिप्त सूतक-अवधि-विचार

सूतक में देव-शास्त्र-गुरु का पूजन-प्रक्षालादि तथा मंदिर जी की जाजम-वस्त्रादि को स्पर्श नहीं करना चाहिये। सूतक का समय पूर्ण हुए बाद पूजनादि, सत्पात्र-दानादि करना चाहिये | १ जन्म का सूतक दस दिन तक माना जाता है | २. यदि स्...

सूतक में देव-शास्त्र-गुरु का पूजन-प्रक्षालादि तथा मंदिर जी की जाजम-वस्त्रादि को स्पर्श नहीं करना चाहिये। सूतक का समय पूर्ण हुए बाद पूजनादि, सत्पात्र-दानादि करना चाहिये |
१ जन्म का सूतक दस दिन तक माना जाता है |
२. यदि स्त्री का गर्भपात (पाँचवें-छठे महीने में) हो, तो जितने महीने के गर्भ का पात हो, उतने दिन का सूतक माना जाता है |
३. प्रसूता स्त्री को ४५ दिन का सूतक होता है, कहीं-कहीं चालीस दिन का भी माना जाता है | प्रसूति स्थान एक मास तक अशुद्ध है |
४. रजस्वला स्त्री चौथे दिन पति के भोजनादि के लिये शुद्ध होती है, परन्तु देव-पूजन, पात्रदान के लिये पाँचवें दिन शुद्ध होती है | व्यभिचारिणी स्त्री के सदा ही सूतक रहता है |
५. मृत्यु का सूतक तीन पीढ़ी तक १२ दिन का माना जाता है। चौथी पीढ़ी में छह दिन का, पाँचवीं-छठी पीढ़ी तक चार दिन का, सातवीं पीढ़ी में तीन दिन, आठवीं पीढ़ी में एक दिन-रात, नवमी पीढ़ी में स्नान-मात्र में शुद्धता हो जाती है |
६. जन्म तथा मृत्यु का सूतक गोत्र के मनुष्य का पाँच दिन का होता है | तीन दिन के बालक की मृत्यु का दस दिन (माता-पिता को), आठ वर्ष के बालक की मृत्यु पर दस दिन परिवार को माना जाता है | इसके आगे बारह दिन का सूतक माना जाता है |
७. अपने कुल के किसी गृहत्यागी का संन्यासमरण या किसी कुटुंबी का संग्राम में मरण हो जाय, तो एक दिन का सूतक माना जाता है |
८. यदि अपने कुल का कोर्इ देशांतर में मरण करे और १० दिन के भीतर खबर सुने, तो शेष दिनों का ही सूतक मानना चाहिये | यदि १० दिन पूर्ण हो, गये हों तो स्नान-मात्र सूतक जानो |
९.गौ, भैंस, घोड़ी आदि पशु अपने घर में जने, तो एक दिन का सूतक और घर के बाहर जने, तो सूतक नहीं होता |
१०. बच्चा हुए बाद भैंस का दूध १५ दिन तक, गाय का दूध १० दिन तक, बकरी का ८ दिन तक अभक्ष्य (अशुद्ध) होता है |
देश-भेद से सूतक-विधान में कुछ न्यूनाधिक भी होता है, परन्तु शास्त्र की पद्धति मिलाकर ही सूतक मानना चाहिए |
← सल्लेखना का स्वरूप पंच कल्याणक तिथि (चार्ट) →

Related Content