पूजा संग्रह · Mixed · Devanagari

स्तुति : तुम तरणतारण

(गीता छन्द) तुम तरणतारण भव-निवारण, भविक-मन आनंदनो | श्री नाभिनंदन जगतवंदन, आदिनाथ निरंजनो ||१|| तुम आदिनाथ अनादि सेऊँ, सेय पद-पूजा करूँ | कैलाशगिरि पर ऋषभ-जिनवर, पद-कमल हिरदै धरूँ |२| तुम अजितनाथ अजीत जीते, अष्टकर्म महाब...

(गीता छन्द)
तुम तरणतारण भव-निवारण, भविक-मन आनंदनो |
श्री नाभिनंदन जगतवंदन, आदिनाथ निरंजनो ||१||
तुम आदिनाथ अनादि सेऊँ, सेय पद-पूजा करूँ |
कैलाशगिरि पर ऋषभ-जिनवर, पद-कमल हिरदै धरूँ |२|
तुम अजितनाथ अजीत जीते, अष्टकर्म महाबली |
यह विरद सुनकर शरण आयो, कृपा कीज्यो नाथजी ||३||
तुम चंद्रवदन सु चंद्रलच्छन, चंद्रपुरी परमेश्वरो |
महासेन-नंदन जगतवंदन, चंद्रनाथ जिनेश्वरो ||४||
तुम शांति पंचकल्याण पूजूं, शुद्ध-मन-वच काय जू |
दुर्भिक्ष चोरी पाप-नाशन, विघन जाय पलाय जू ||५||
तुम बालब्रह्म विवेक-सागर, भव्यकमल विकाशनो |
श्री नेमिनाथ पवित्र दिनकर, पापतिमिर विनाशनो ||६||
जिन तजी राजुल राजकन्या, कामसेन्या वश करी |
चारित्र-रथ चढ़ भये दुलहा, जाय शिवरमणी वरी ||७||
कंदर्प-दर्प सु सर्पलच्छन, कमठ-शठ निर्मद कियो |
अश्वसेन-नंदन जगतवंदन, सकल-संघ मंगल कियो ||८||
जिनधरी बालकपणे दीक्षा, कमठ-मान विदार के |
श्रीपार्श्वनाथ-जिनंद के पद, मैं नमूं सिरधार के ||९||
तुम कर्मघाता मोक्षदाता, दीन जानि दया करो |
सिद्धार्थ-नंदन जगतवंदन, महावीर जिनेश्वरो ||१०||
त्रय-छत्र सोहें सुर-नर मोहें, वीनती अब धारिये |
कर जोड़ि सेवक वीनवे प्रभु, आवागमन निवारिये ||११||
अब होउ भव-भव स्वामि मेरे, मैं सदा सेवक रहूं |
कर जोड़ यो वरदान माँगूँ, मोक्ष-फल जावत लहूँ ||१२||
जो एक माँहीं एक राजे, एक माँहि अनेकनो |
इक-अनेक की नहीं संख्या, नमूँ सिद्ध निरंजनो ||१३||
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