स्तोत्र संग्रह · Mixed · Devanagari

आरती : पंच-परमेष्ठी

कविश्री द्यानतराय (चौपार्इ) इह विधि मंगल आरति कीजे, पंच परमपद भज सुख लीजे | इह विधि मंगल आरति कीजे, पंच परमपद भज सुख लीजे पहली आरति श्रीजिनराजा, भव दधि पार उतार जिहाजा | इह विधि मंगल आरति कीजे, पंच परमपद भज सुख लीजे | दू...

कविश्री द्यानतराय
(चौपार्इ)
इह विधि मंगल आरति कीजे, पंच परमपद भज सुख लीजे |
इह विधि मंगल आरति कीजे, पंच परमपद भज सुख लीजे
पहली आरति श्रीजिनराजा, भव दधि पार उतार जिहाजा |
इह विधि मंगल आरति कीजे, पंच परमपद भज सुख लीजे |
दूसरी आरति सिद्धन केरी, सुमिरन करत मिटे भव फेरी |
इह विधि मंगल आरति कीजे, पंच परमपद भज सुख लीजे |
तीजी आरति सूरि मुनिंदा, जनम मरन दु:ख दूर करिंदा |
इह विधि मंगल आरति कीजे, पंच परमपद भज सुख लीजे |
चौथी आरति श्री उवझाया, दर्शन देखत पाप पलाया |
इह विधि मंगल आरति कीजे, पंच परमपद भज सुख लीजे |
पाँचमि आरति साधु तिहारी, कुमति विनाशन शिव अधिकारी |
इह विधि मंगल आरति कीजे, पंच परमपद भज सुख लीजे |
छट्ठी ग्यारह प्रतिमाधारी, श्रावक वंदूं आनंदकारी |
इह विधि मंगल आरति कीजे, पंच परमपद भज सुख लीजे |
सातमि आरति श्रीजिनवानी, ‘द्यानत’ सुरग मुकति सुखदानी |
इह विधि मंगल आरति कीजे, पंच परमपद भज सुख लीजे |
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