स्तोत्र संग्रह · Mixed · Devanagari

आरती श्री जिनराज की

कविश्री द्यानतराय आरती श्रीजिनराज तिहारी, करम दलन संतन हितकारी | सुर नर असुर करत तुम सेवा, तुमही सब देवन के देवा | आरती श्रीजिनराज तिहारी, करम दलन संतन हितकारी | पंच महाव्रत दुर्द्धर धारे, राग रोष परिणाम विदारे | आरती श्...

कविश्री द्यानतराय
आरती श्रीजिनराज तिहारी, करम दलन संतन हितकारी |
सुर नर असुर करत तुम सेवा, तुमही सब देवन के देवा |
आरती श्रीजिनराज तिहारी, करम दलन संतन हितकारी |
पंच महाव्रत दुर्द्धर धारे, राग रोष परिणाम विदारे |
आरती श्रीजिनराज तिहारी, करम दलन संतन हितकारी |
भव भय भीत शरन जे आये, ते परमारथ पंथ लगाये |
आरती श्रीजिनराज तिहारी, करम दलन संतन हितकारी |
जो तुम नाम जपे मनमाँही, जनम मरन भय ताको नाहीं |
आरती श्रीजिनराज तिहारी, करम दलन संतन हितकारी |
समवसरन संपूरन शोभा, जीते क्रोध मान छल लोभा |
आरती श्रीजिनराज तिहारी, करम दलन संतन हितकारी |
तुम गुण हम कैसे करि गावें, गणधर कहत पार नहिं पावें |
आरती श्रीजिनराज तिहारी, करम दलन संतन हितकारी |
करुणासागर करुणा कीजे, ‘द्यानत’ सेवक को सुख दीजे |
आरती श्रीजिनराज तिहारी, करम दलन संतन हितकारी |
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