आसिका लेने का पद
श्री जिनवर की आसिका, लीजे शीश चढ़ाय | भव-भव के पातक कटें, दु:ख दूर हो जाय || (जल बिन्दुओं से असिका पर बनाये स्वस्तिकादि मिटा कर इसे गंधोदक में मिला दें. फिर स्तुति, भजन आदि बोलते हुए वेदी-सहित प्रतिमाजी की तीन प्रदक्षिणा...
भव-भव के पातक कटें, दु:ख दूर हो जाय ||
(जल बिन्दुओं से असिका पर बनाये स्वस्तिकादि मिटा कर इसे गंधोदक में मिला दें. फिर स्तुति, भजन आदि बोलते हुए वेदी-सहित प्रतिमाजी की तीन प्रदक्षिणा देकर धोक देनी चाहिए)
आरती लेने का पद
श्री जिनवर की आरती, लीजे शीश चढ़ाय |
मोह तिमिर को नाश कर, केवल ज्योति उपाय||
(दीपक में घी उतना ही डालें जितना मंदिर-पट बंद होने तक ही ज्योत रहे. दीपक बुझाना आगम सम्मत नहीं है)