पूजा संग्रह · Mixed · Devanagari

गौतम स्वामी जी का अर्घ्य

(पूर्ण-पूजन हेतु पृष्ठ 384 देखें) गौतमादिक सर्वे एकदश गणधरा | वीर जिन के मुनि सहस चौदह वरा || नीर गंधाक्षतं पुष्प चरु दीपकं | धूप फल अर्घ्य ले हम जजें महर्षिकं || (इस प्रकार अर्घ्य चढ़ाकर लाभ आदि में विघ्न करनेवाले अन्तर...

(पूर्ण-पूजन हेतु पृष्ठ 384 देखें)
गौतमादिक सर्वे एकदश गणधरा |
वीर जिन के मुनि सहस चौदह वरा ||
नीर गंधाक्षतं पुष्प चरु दीपकं |
धूप फल अर्घ्य ले हम जजें महर्षिकं ||
(इस प्रकार अर्घ्य चढ़ाकर लाभ आदि में विघ्न करनेवाले अन्तराय कर्म को दूर करने के लिये नीचे लिखा हुआ अर्घ्य चढ़ावें-)
ॐ ह्रीं श्रीमहावीर-जिनस्य गौतमाद्येकादश-गणधर-चतुर्दशसहस्र मुनिवरेभ्यो अर्घ्यं निर्वपामीति स्वाहा ।
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