06. भगवान पद्मप्रभु चालीसा — वैकल्पिक पाठ
मिलती हुई पंक्ति
“तीर्थंकर के मात-पिता को, है अहार-नीहार नहीं है।।८।।”
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190 परिणाम “णमोकार” के लिए
मिलती हुई पंक्ति
“तीर्थंकर के मात-पिता को, है अहार-नीहार नहीं है।।८।।”
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“जय जय श्री महावीर हितंकर। जय हो चौबिसवें तीर्थंकर।।१।।”
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“माँ को कष्ट न होता क्योंकी, पुण्यमयी तीर्थंकर प्रकृती।।१०।।”
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“तीर्थंकर नमिनाथ हैं, इक्किसवें तीर्थेश।”
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“नामकरण भी सुरपति करते, पाण्डुशिला पर अभिषव करते।।१०।।”
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“तीर्थंकर-चक्री तथा कामदेव जगमान्य।।३।।”
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“प्रभु तुम तीर्थंकर सत्रहवें, कामदेव भी थे तेरहवें।।३।।”
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“धर्मनाथ भगवान हैं, धर्मचक्र के ईश। इनके चरण सरोज को, नमूँ नमाकर शीश।।१।।”
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“अनन्त गुणाकर नाथ! तुम, कर दो मम कल्याण।।२।।”
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“ऋषभदेव से वासुपूज्य तक, बारह तीर्थंकर हैं सुखकर।।१।।”
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“नौ महिने के बाद मात ने, जन्म दिया तीर्थंकर शिशु को।।११।।”
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“तुम हो ग्यारहवें तीर्थंकर, तुम हो प्रभु जग में श्रेयस्कर।।२।।”
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“क्यों तीर्थंकर उसको तजते!, क्यों संयम को धारण करते ?।।२३।।”
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“जय हो शांतिनाथ जिनवर जी, सोलहवें तीर्थंकर प्रभु जी।।१।।”
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“एक बार का है घटनाक्रम, सती अंजना का टूटा भ्रम।।७।।”
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“तीर्थंकर मुख से खिरी, नमूँ दिव्यध्वनि सार। द्वादशांगमय सरस्वती, को वन्दन शत बार।।१।।”
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“हों जयवन्त बीस ये जिनवर, सिद्ध बने थे जो तीर्थंकर।।२।।”
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“पुष्पदन्त तीर्थंकर प्यारे, काकन्दी के राजदुलारे।।१।।”
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“पूर्वापर दोषों रहित, सच्चा आगम शास्त्र। ज्ञान प्राप्ति के हेतु ही, नमूँ नमाकर माथ।।२।।”
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“प्रभु तुम हो सप्तम तीर्थंकर, स्वस्तिक चिन्ह सहित हो प्रभुवर।।३।।”
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“प्रथम तीर्थंकर ऋषभदेव जी, अजितनाथ, अभिनन्दन प्रभु जी।।३।।”
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“श्री अभिनन्दनाथ तीर्थंकर, तीनों लोकों में आनन्दकर।।१।।”
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“राजा बनकर धर्मनीति से, राज्य किया बहु कुशलरीति से।।९।।”
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“अजितनाथ तीर्थंकर जन्मे, स्वर्ण सदृश वे चमक रहे थे।।१०।।”
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“इन्हीं भाग्यशाली माता से, शान्तिनाथ तीर्थंकर जन्मे।।७।।”
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“उसमें वर्णित कई वाक्य हैं,तीर्थंकर प्रभु वचन सार्थ हैं”
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“आदीश्वर प्रभुवर की यक्षी,भक्तों के हित करुणाकर हो”
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“जिन मुनि बनकर कर्म खपाया, तुंगीगिरि से शिवपद पाया।।४।।”
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