पूजा विधि प्रारम्भ
ॐ जय! जय! जय! | नमोऽस्तु! नमोऽस्तु! नमोऽस्तु!| णमो अरिहंताणं, णमो सिद्धाणं, णमो आइरियाणं | णमो उवज्झायाणं, णमो लोए सव्वसाहूणं || ॐ ह्रीं अना...
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पूजा, अर्घ्य, अभिषेक और विधान—स्रोत तथा समीक्षा विवरण सहित
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ॐ जय! जय! जय! | नमोऽस्तु! नमोऽस्तु! नमोऽस्तु!| णमो अरिहंताणं, णमो सिद्धाणं, णमो आइरियाणं | णमो उवज्झायाणं, णमो लोए सव्वसाहूणं || ॐ ह्रीं अना...
विवरण खोलें →पंच कल्याणक अर्घ्य उदक-चंदन-तंदुल-पुष्पकैश्चरु-सुदीप-सुधूप-फलार्घ्यकैः | धवल-मंगल-गान-रवाकुले जिनगृहे कल्याणकमहं यजे || ॐ ह्रीं श्री भगवतो ग...
विवरण खोलें →श्रीमज्जिनेन्द्रमभिवंद्य जगत्त्रयेशम्, स्याद्वाद-नायक-मनंत-चतुष्टयार्हम् | श्रीमूलसंघ-सुदृशां सुकृतैकहेतुर्, जैनेन्द्र-यज्ञ-विधिरेष मयाऽभ्यध...
विवरण खोलें →श्री वृषभो न: स्वस्ति, स्वस्ति श्री अजित:| श्री संभव: स्वस्ति, स्वस्ति श्री अभिनंदन:| श्री सुमति: स्वस्ति, स्वस्ति श्री पद्मप्रभ:| श्री सुपा...
विवरण खोलें →(इस विधान में परम–ऋषियों (परमेष्ठियों) में प्रकट आत्मा की चौंसठ (64) ऋद्धियों का स्मरण कर पुष्प–क्षेपण किया गया है। ऋद्धि का अर्थ आत्मा की व...
विवरण खोलें →(कविश्री द्यानत राय जी) (पूजन विधि निर्देश) (अडिल्ल छन्द) प्रथम देव अरहंत सुश्रुत सिद्धांत जू | गुरु निर्ग्रन्थ महन्त मुकतिपुर-पन्थ जू || ती...
विवरण खोलें →द्रव्य आठों जु लीना है, अर्घ्य कर में नवीना है। पूजतां पाप छीना है, ‘भानुमल’ जोर कीना है।। द्वीप अढ़ार्इ सरस राजै, क्षेत्र दश ता-विषै छाजें...
विवरण खोलें →कवि श्री द्यानतराय (पूजन विधि निर्देश) द्वीप अढ़ाई मेरु पन, सब तीर्थंकर बीस | तिन सबकी पूजा करूँ, मन-वच-तन धरि शीस || ॐ ह्रीं श्री विद्यमान व...
विवरण खोलें →आचार्य पद्मनन्दि पूजाएँ दो प्रकार से की जा सकती हैं। ‘द्रव्यपूजा’ द्रव्याष्टक बोलते हुए क्रमश: द्रव्य चढ़ाते हुए करते हैं। जबकि ‘भावपूजा’ आर...
विवरण खोलें →(पूजन विधि निर्देश) निज-मनोमणि-भाजन-भारया, समरसैक-सुधारस-धारया | सकल-बोध-कला-रमणीयकं, सहज-सिद्धमहं परिपूजये || मोहि तृषा दु:ख देत, सो तुमने...
विवरण खोलें →कविश्री हीराचंद (पूजन विधि निर्देश) (अडिल्ल छन्द) अष्ट-करम करि नष्ट अष्ट-गुण पाय के, अष्टम-वसुधा माँहिं विराजे जाय के | ऐसे सिद्ध अनंत महं...
विवरण खोलें →कवि श्री वृन्दावनदास (पूजन विधि निर्देश) (छन्द चौबोला) ऋषभ अजित संभव अभिनंदन, सुमति पदम सुपार्श्व जिनराय | चंद पुहुप शीतल श्रेयांस-जिन, वासु...
विवरण खोलें →कविश्री जिनेश्वरदास (पूजन विधि निर्देश) (कुसुमलता छंद) नाभिराय-मरुदेवि के नंदन, आदिनाथ स्वामी महाराज | सर्वार्थसिद्धि तें आय पधारे, मध्य-लोक...
विवरण खोलें →कविश्री बख्तावरसिंह (पूजन विधि निर्देश) (अडिल्ल छंद) सर्वारथ सुविमान त्याग गजपुर में आये | विश्वसेन भूपाल तासु के नंद कहाये || पंचम-चक्री भय...
विवरण खोलें →कवि श्री बख्तावरसिंह (पूजन विधि निर्देश) (गीता छन्द) वर स्वर्ग प्राणत सों विहाय सुमात वामा-सुत भये | अश्वसेन के पारस जिनेश्वर चरन जिनके सुर...
विवरण खोलें →कविश्री वृन्दावनदास (पूजन विधि निर्देश) (मत्त-गयंद छन्द) श्रीमत वीर हरें भव-पीर, भरें सुख-सीर अनाकुलताई | केहरि-अंक अरीकर-दंक, नयें हरि-पंक...
विवरण खोलें →श्री देव-शास्त्र-गुरु,श्री विद्यमान बीस तीर्थंकर, श्री अनंतानंत सिद्ध परमेष्ठी समूह कविश्री ब्र. सरदारमल सच्चिदानंद (दोहा) देव-शास्त्र-गुरु...
विवरण खोलें →कविश्री युगलजी केवल-रवि-किरणों से जिसका, सम्पूर्ण प्रकाशित है अंतर | उस श्री जिनवाणी में होता, तत्वों का सुन्दरतम दर्शन || सद्दर्शन-बोध-चरण-...
विवरण खोलें →कविश्री रूपचंद (छंद जोगीरासा) नाभिराय मरुदेवी के नंदन, हो अतिशय के धारी | कैलास-शैल से मोक्ष पधारे, जन-जन मंगलकारी || संवत् पाँच सौ बारह में...
विवरण खोलें →कविश्री ताराचंद ‘प्रेमी’ (चौबोला छंद) हे कर्मभूमि के अधिनायक, जग-जन के जीवन-ज्योतिधाम | वाणी में श्रुत-जिनवाणी का, झरता अविरल अमृत ललाम || ह...
विवरण खोलें →कविश्री छोटेलाल (दोहावली) श्रीधर-नंदन पद्मप्रभ, वीतराग जिननाथ | विघ्नहरण मंगलकरन, नमौं जोरि जुग-हाथ || जन्म-महोत्सव के लिए, मिलकर सब सुरराज...
विवरण खोलें →कविवर मुंशी शुभ पुण्य-उदय से ही प्रभुवर! दर्शन तेरा कर पाते हैं | केवल दर्शन से ही प्रभु, सारे पाप मेरे कट जाते हैं || देहरे के चंद्रप्रभ-स्...
विवरण खोलें →आचार्य श्री विद्याभूषण सन्मति सागर जी स्थापना (शार्दूल विक्रीडित छन्द) नेमीनाथ महान आप भुवि में, राजे विभो सर्वदा | हो सम्राट विशाल सर्व वसु...
विवरण खोलें →कविश्री ‘पुष्पेन्दु’ हे पार्श्वनाथ! हे अश्वसेन-सुत! करुणासागर तीर्थंकर | हे सिद्धशिला के अधिनायक! हे ज्ञान-उजागर तीर्थंकर || हमने भावुकता मे...
विवरण खोलें →कविश्री पूरनमल (गीता छन्द) श्री वीर सन्मति गाँव ‘चाँदन’, में प्रगट भये आयकर | जिनको वचन-मन-काय से, मैं पूजहूँ सिर नायकर || ये दयामय नार-नर...
विवरण खोलें →गणिनी-आर्यिका ज्ञानमती जी (गीता छन्द) अरिहंत सिद्धाचार्य पाठक, साधु त्रिभुवन-वंद्य हैं | जिनधर्म जिन-आगम जिनेश्वर, मूर्ति जिनगृह वंद्य हैं |...
विवरण खोलें →कविश्री राजमल पवैया अर्हन्त सिद्ध आचार्य नमन! हे उपाध्याय! हे साधु! नमन | जय पंच परम परमेष्ठी जय, भवसागर तारणहार नमन || मन-वच-काया-पूर्वक कर...
विवरण खोलें →कवि श्री जुगलकिशोर युगल” (हरिगीतिका) निज वज्र-पौरुष से प्रभो! अंतर-कलुष सब हर लिये | प्रांजल प्रदेश-प्रदेश में, पीयूष-निर्झर झर गये || सर्वो...
विवरण खोलें →(कवि श्री जिनेश्वरदासजी) (पूजन विधि निर्देश) (दोहा) कर्म-अरिगण जीत के, दरशायो शिव-पंथ | सिद्ध-पद श्रीजिन लह्यो, भोगभूमि के अंत || समर-दृष्टि...
विवरण खोलें →आर्यिका स्वस्तिभूषणमती जी (पूजन विधि निर्देश) (शंभू छन्द) करम-अत ममकतपकर, सदधलय जवस कय वीर प्रभू के शिष्य अनुपम, वीर प्रभू पथ गमन किया || दव...
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