आराधना-पाठ
कविश्री द्यानतराय (स्नान करते समय बोलना चाहिए) मैं देव नित अरहंत चाहूँ, सिद्ध का सुमिरन करौं | सूरि-गुरु-मुनि तीन पद ये, साधुपद हिरदय धरौं || मैं धर्म...
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कविश्री द्यानतराय (स्नान करते समय बोलना चाहिए) मैं देव नित अरहंत चाहूँ, सिद्ध का सुमिरन करौं | सूरि-गुरु-मुनि तीन पद ये, साधुपद हिरदय धरौं || मैं धर्म...
पढ़ें →कविश्री द्यानतराय (दोहा) बानी एक नमो सदा, एक दरब आकाश | एक धर्म अधर्म दरब, ‘पड़िवा’ शुद्धि प्रकाश ||१|| (चौपार्इ छन्द) ‘दोज’ दुभेद सिद्ध संसार, संसारी...
पढ़ें →आचार्य नेमिचन्द्र सिद्धान्तचक्रवर्ती; अंग्रेजी अनुवाद: Sarat Chandra Ghoshal (1917)
आचार्य नेमिचन्द्र सिद्धान्तचक्रवर्ती के द्रव्यसंग्रह का Sarat Chandra Ghoshal कृत 1917 अंग्रेजी अनुवाद—सभी 58 पद्य, तीन अध्ययन-भागों में।
पढ़ें →भगवान महावीर चालीसा का पूर्ण, स्वच्छ और पंक्तिबद्ध हिन्दी पाठ।
पढ़ें →भगवान श्रेयांसनाथ चालीसा का पूर्ण, स्वच्छ और पंक्तिबद्ध हिन्दी पाठ।
पढ़ें →तीर्थंकरत्रय चालीसा का पूर्ण, स्वच्छ और पंक्तिबद्ध हिन्दी पाठ।
पढ़ें →श्री शैल चालीसा (हनुमान चालीसा) का पूर्ण, स्वच्छ और पंक्तिबद्ध हिन्दी पाठ।
पढ़ें →सरस्वती चालीसा का पूर्ण, स्वच्छ और पंक्तिबद्ध हिन्दी पाठ।
पढ़ें →सम्मेदशिखर चालीसा का पूर्ण, स्वच्छ और पंक्तिबद्ध हिन्दी पाठ।
पढ़ें →भगवान चन्द्रप्रभु चालीसा का पूर्ण, स्वच्छ और पंक्तिबद्ध हिन्दी पाठ।
पढ़ें →भगवान सुमतिनाथ चालीसा का पूर्ण, स्वच्छ और पंक्तिबद्ध हिन्दी पाठ।
पढ़ें →भगवान संभवनाथ चालीसा का पूर्ण, स्वच्छ और पंक्तिबद्ध हिन्दी पाठ।
पढ़ें →भगवान अजितनाथ चालीसा का पूर्ण, स्वच्छ और पंक्तिबद्ध हिन्दी पाठ।
पढ़ें →भगवान शांतिनाथ चालीसा का पूर्ण, स्वच्छ और पंक्तिबद्ध हिन्दी पाठ।
पढ़ें →श्री क्षेत्रपाल चालीसा का पूर्ण, स्वच्छ और पंक्तिबद्ध हिन्दी पाठ।
पढ़ें →श्री पद्मावती माता चालीसा का पूर्ण, स्वच्छ और पंक्तिबद्ध हिन्दी पाठ।
पढ़ें →श्री चक्रेश्वरी माता चालीसा का पूर्ण, स्वच्छ और पंक्तिबद्ध हिन्दी पाठ।
पढ़ें →चौबीस तीर्थंकर निर्वाणभूमि चालीसा का पूर्ण, स्वच्छ और पंक्तिबद्ध हिन्दी पाठ।
पढ़ें →चौबीस तीर्थंकर जन्मभूमि चालीसा का पूर्ण, स्वच्छ और पंक्तिबद्ध हिन्दी पाठ।
पढ़ें →श्रावक कौन? जो श्रद्धावान हो, विवेकवान हो और क्रियाशील हो| श्रद्धा हो जिनेन्द्र-देव और जिनागम में, विवेक हो अपने कल्याण का, और क्रियाएँ हों अपने कल्या...
पढ़ें →ओं नम: सिद्धेभ्य: । ओं नम: सिद्धेभ्य: । ओं नम: सिद्धेभ्य: । चिदानन्दैकरूपाय जिनाय परमात्मने । परमात्मप्रकाशाय नित्यं सिद्धात्मने नम: ।। अर्थ:- उन श्री...
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