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तत्त्वार्थसूत्रम् — मूल संस्कृत पाठ
आचार्य उमास्वामी (उमास्वाति)
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“॥ तत्त्वार्थसूत्रम् — प्रथम अध्याय ॥”
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आचार्य उमास्वामी (उमास्वाति)
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“॥ तत्त्वार्थसूत्रम् — प्रथम अध्याय ॥”
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“… इसकी तकनीकी अवधि, कर्म-स्थिति और आरोह-अवरोह के लिए गोम्मटसार, षट्खण्डागम, तत्त्वार्थसूत्र तथा उनकी प्रामाणिक टीकाओं का सहारा लें।”
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“तत्त्वार्थसूत्र का आरम्भिक सूत्र सम्यग्दर्शन, सम्यग्ज्ञान और सम्यक्चरित्र को मोक्षमार्ग बताता है। इन तीनों को रत्नत्रय या तीन रत्न कहा जाता है।”
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“।। इति तत्त्वार्थसूत्रे मोक्षशास्त्रे प्रथमोऽध्याय: ।।१।।”
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“तत्वार्थसूत्र में श्री उमास्वामी आचार्य ने कहा है कि ‘व्रती को शल्य रहित होना चाहिए”
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