जैन ज्ञान

जैन ज्ञान, दर्शन और लेख

Results: 21

Text Content | Sanskrit

समुच्चय महार्घ्य

(गीता छंद) मैं देव श्री अरिहन्त पूजूँ सिद्ध पूजूँ चाव सों | आचार्य श्री उवझाय पूजूँ साधु पूजूँ भाव सों ||१|| अरिहन्त-भाष...

Text Content | Mixed

शुभ + लाभ

श्री ऋषभदेवाय नम: | श्री महावीराय नम: | श्री गौतम-गणधराय नम: | श्री केवलज्ञान-लक्ष्म्यै नम: | श्री जिन-सरस्वत्यै नम:। शर...

Text Content | Hindi

रत्नाकर पंचविंशतिका

श्री रत्नाकर सूरि विरचित स्तोत्र का हिन्दी पद्यानुवाद कविश्री रामचरित उपाध्याय शुभ-केलि के आनंद के धन के मनोहर धाम हो, न...

Text Content | Mixed

बारह भावना

कविश्री भूधर दासजी (अनित्य भावना) राजा राणा छत्रपति, हाथिन के असवार | मरना सबको एक दिन, अपनी-अपनी बार ||१|| (अशरण भावना)...

Text Content | Mixed

मेरी-भावना

कविश्री जुगलकिशोर जिसने राग-द्वेष-कामादिक जीते, सब जग जान लिया | सब जीवों को मोक्षमार्ग का, निस्पृह हो उपदेश दिया || बुद...

Text Content | Mixed

दु:खहरण-विनती

कविश्री वृन्दावन दास (शैर की लय में तथा और रागिनियों में भी बनती है।) श्रीपति जिनवर करुणायतनं, दु:खहरन तुम्हारा बाना है...

Text Content | Mixed

आत्म-कीर्तन

कविश्री मनोहरलाल वर्णी ‘सहजानंद’ हूँ स्वतंत्र निश्चल निष्काम, ज्ञाता-दृष्टा आतम-राम | मैं वह हूँ जो हैं भगवान्, जो मैं ह...

Text Content | Mixed

इष्ट-प्रार्थना

भावना दिन-रात मेरी, सब सुखी संसार हो | सत्य-संयम-शील का, व्यवहार हर घर-बार हो || धर्म का परचार हो, अरु देश का उद्धार हो...

Text Content | Mixed

आत्म-रमण

कविश्री मनोहरलाल वर्णी ‘सहजानंद’ मैं दर्शन-ज्ञान-स्वरूपी हूँ, मैं सहजानंद-स्वरूपी हूँ | हूँ ज्ञानमात्र परभाव शून्य, हूँ...

Text Content | Mixed

आत्म-भक्ति

कविश्री मनोहरलाल वर्णी ’सहजानंद’ मेरे शाश्वत-शरण, सत्य-तारणतरण ब्रह्म प्यारे | तेरी भक्ति में क्षण जायें सारे || टेक|| ज...

Text Content | Prakrit

शास्त्र-स्वाध्याय विधि

प्रारम्भिक मंगलाचरण ओं नम: सिद्धेभ्य:! ओं जय! जय! जय! नमोऽस्तु ! नमोऽस्तु !! नमोऽस्तु !!! णमो अरिहंताणं, णमो सिद्धाणं, ण...

Text Content | Mixed

श्रावक-प्रतिक्रमण

श्रावक कौन? जो श्रद्धावान हो, विवेकवान हो और क्रियाशील हो| श्रद्धा हो जिनेन्द्र-देव और जिनागम में, विवेक हो अपने कल्याण...

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श्रावक-प्रतिक्रमण (लघु)

ओं नम: सिद्धेभ्य: । ओं नम: सिद्धेभ्य: । ओं नम: सिद्धेभ्य: । चिदानन्दैकरूपाय जिनाय परमात्मने । परमात्मप्रकाशाय नित्यं सिद...

Text Content | Mixed

रस त्याग विचार

रस-त्याग के अभ्यास से हम अपनी जिव्हा इंद्रिय पर नियंत्रण कर सकते हैं | रविवार को – नमक (खारे पदार्थ) सोमवार को – हरे फल...

Text Content | Mixed

ग्यारह-प्रतिमा-व्रत क्रम

श्रावक की भूमिका में मोक्षमार्ग के अनुरूप आचरण करने के लिए ग्यारह प्रतिमा व्रतों का पालन करते हुए धर्म साधना करते है :-...