समुच्चय पूजा
श्री देव-शास्त्र-गुरु,श्री विद्यमान बीस तीर्थंकर, श्री अनंतानंत सिद्ध परमेष्ठी समूह कविश्री ब्र. सरदारमल सच्चिदानंद (दोहा) देव-शास्त्र-गुरु नमन करि, ब...
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श्री देव-शास्त्र-गुरु,श्री विद्यमान बीस तीर्थंकर, श्री अनंतानंत सिद्ध परमेष्ठी समूह कविश्री ब्र. सरदारमल सच्चिदानंद (दोहा) देव-शास्त्र-गुरु नमन करि, ब...
विवरण खोलें →आचार्य श्री विद्याभूषण सन्मति सागर जी स्थापना (शार्दूल विक्रीडित छन्द) नेमीनाथ महान आप भुवि में, राजे विभो सर्वदा | हो सम्राट विशाल सर्व वसुधा, आभा य...
विवरण खोलें →कविश्री ‘पुष्पेन्दु’ हे पार्श्वनाथ! हे अश्वसेन-सुत! करुणासागर तीर्थंकर | हे सिद्धशिला के अधिनायक! हे ज्ञान-उजागर तीर्थंकर || हमने भावुकता में भरकर, तु...
विवरण खोलें →कवि श्री जुगलकिशोर युगल” (हरिगीतिका) निज वज्र-पौरुष से प्रभो! अंतर-कलुष सब हर लिये | प्रांजल प्रदेश-प्रदेश में, पीयूष-निर्झर झर गये || सर्वोच्च हो अतए...
विवरण खोलें →(कवि श्री जिनेश्वरदासजी) (पूजन विधि निर्देश) (दोहा) कर्म-अरिगण जीत के, दरशायो शिव-पंथ | सिद्ध-पद श्रीजिन लह्यो, भोगभूमि के अंत || समर-दृष्टि-जल जीत लह...
विवरण खोलें →कविश्री द्यानतराय (पूजन विधि निर्देश) (गीता छन्द) तीर्थंकरों के न्हवन-जल तें, भये तीरथ शर्मदा | ता तें प्रदच्छन देत सुर-गन, पंच-मेरुन की सदा || दो-जलध...
विवरण खोलें →कविश्री द्यानतराय (पूजन विधि निर्देश) (आडिल्ल छन्द) सरब-परव में बड़ो अठार्इ परव है | नंदीश्वर सुर जाहिं लेय वसु दरब है || हमें सकति सो नाहिं इहाँ करि...
विवरण खोलें →कविश्री द्यानतराय समुच्चय-जयमाला (पूजन विधि निर्देश) (दोहा) चहुँगति-फनि-विष-हरन-मणि, दु:ख-पावक जल-धार | शिव-सुख-सुधा-सरोवरी, सम्यक्-त्रयी निहार || ॐ ह...
विवरण खोलें →(पूजन विधि निर्देश) (दोहा) सिद्ध अष्ट -गुणमय प्रगट, मुक्त-जीव-सोपान । ज्ञान चरित जिंह बिन अफल, सम्यक्दर्श प्रधान ।। ॐ ह्रीं श्री अष्टांग सम्यग्दर्शन !...
विवरण खोलें →(पूजन विधि निर्देश) (दोहा) पंच भेद जाके प्रकट, ज्ञेय-प्रकाशन-भान | मोह-तपन-हर चंद्रमा, सोर्इ सम्यक्ज्ञान || ॐ ह्रीं श्री अष्टविधसम्यग्ज्ञान ! अत्र अव...
विवरण खोलें →(दोहा) विषय-रोग औषध महा, दव-कषाय जलधार | तीर्थंकर जाको धरे, सम्यक्चारित सार || ॐ ह्रीं श्री त्रयोदशविध-सम्यक्चारित्र ! अत्र अवतर अवतर संवौषट्! (आह्वान...
विवरण खोलें →कविश्री मल्ल (पूजन विधि निर्देश) (छप्पय छन्द) अंग-क्षमा जिन-धर्म तनों दृढ़-मूल बखानो | सम्यक्-रतन संभाल हृदय में निश्चय जानो || तज मिथ्या-विषमूल और चि...
विवरण खोलें →कविश्री अरदास (पूजन विधि निर्देश) (दोहा) श्री जिन पंच अनंग-जित, वासुपूज्य मल्लि नेम | पारसनाथ सु वीर अति, पूजूँ चित-धरि प्रेम || ॐ ह्रीं श्री पंचबालय...
विवरण खोलें →वंदूं पाँचों परमगुरु सुरगुरु-वंदत जास | विघनहरण मंगलकरण, पूरन परम-प्रकाश |१| चौबीसों जिनपति नमूं, नमूं शारदा-माय | शिवमग-साधक साधु नमि, रच्यो पाठ सुखद...
विवरण खोलें →(पूजन विधि निर्देश) (अडिल्ल) परमपूज्य वृषभेष स्वयंभू देव जू | पिता नाभि मरुदेवि करें सुर सेव जू | कनक-वरण तन-तुंग धनुष-पनशत तनो | कृपासिंधु इत आइ तिष्...
विवरण खोलें →(पूजन विधि निर्देश) त्याग वैजयन्त सार, सार धर्म के अधार | जन्म-धार धीर नम्र, सुष्टु कौशलापुरी || अष्ट दुष्ट नष्टकार, मातु वैजयाकुमारि | आयु लक्षपूर्व...
विवरण खोलें →(पूजन विधि निर्देश) (छन्द मदावलिप्तकपोल) जय संभव जिनचंद सदा हरिगन-चकोर-नुत | जयसेना जसु मातु जैति राजा जितारिसुत || तजि ग्रीवक लिय जन्म नगर-श्रावस्ती...
विवरण खोलें →(पूजन विधि निर्देश) अभिनंदन आनंदकंद, सिद्धारथ-नंदन | संवरपिता दिनंद चंद, जिहिं आवत वंदन || नगर-अयोध्या जनम इन्द, नागिंद जु ध्यावें | तिन्हें जजन के हे...
विवरण खोलें →(पूजन विधि निर्देश) जयमाला (दोहा) संजम-रतन-विभूषन-भूषित, दूषन-वर्जित श्री जिनचंद | सुमति-रमा-रंजन भव-भंजन, संजयंत-तजि मेरु-नरिंद || मातु-मंगला सकल मंग...
विवरण खोलें →(पूजन विधि निर्देश) जयमाला (दोहा) (छन्द रोड़क मदावलिप्तकपोल) पदम-राग-मनि-वरन-धरन, तन-तुंग अढ़ार्इ | शतक दंड अघ-खंड, सकल-सुर सेवत आर्इ || धरनि तात विख्...
विवरण खोलें →(पूजन विधि निर्देश) (छन्द हरिगीता तथा गीता) जय-जय जिनिंद गनिंद इन्द, नरिंद गुन-चिंतन करें | तन हरी-हर मन-सम हरत मन,लखत उर-आनंद भरें | नृप-सुपरतिष्ठ वर...
विवरण खोलें →(पूजन विधि निर्देश) (छप्पय अनौष्ठ्य) चारु-चरन आचरन, चरन चितहरन- चिह्नचर | चंद चंद-तनचरित, चंदथल चहत चतुर-नर || चतुक-चंड चकचूरि, चारि चिद्चक्र गुनाकर |...
विवरण खोलें →(पूजन विधि निर्देश) पुष्पदंत भगवंत संत सु जपंत तंत गुन | महिमावंत महंत कंत शिव-तिय-रमंत मुन || काकंदीपुर जन्म पिता-सुग्रीव रमा-सुत | स्वेत-वरन मनहरन...
विवरण खोलें →(पूजन विधि निर्देश) (छन्द मत्तमातंग, मत्तगयन्द,मात्रा २३) शीतलनाथ नमो धरि हाथ, सु माथ जिन्हों भव-गाथ मिटाये | अच्युत तें च्युत मात-सुनंद के, नंद भये प...
विवरण खोलें →(पूजन विधि निर्देश) (छन्द रूपमाला तथा गीता) विमल-नृप विमला सुअन, श्रेयांसनाथ-जिनंद | सिंहपुर जन्मे सकल हरि, पूजि धरि आनंद || भव-बंध ध्वंसनि-हेत लखि, म...
विवरण खोलें →(पूजन विधि निर्देश) (छन्द रूपकवित्त) श्रीमत वासुपूज्य जिनवर-पद, पूजन-हेत हिये उमगाय | थापूं मन-वच-तन शुचि करके, जिनकी पाटलदेव्या माय || महिष-चिह्न पद-...
विवरण खोलें →(पूजन विधि निर्देश) सहस्रार-दिवि त्यागि, नगर-कम्पिला जनम लिय | कृत-वर्मा-नृप-नंद, मातु-जयश्यामा धर्मप्रिय | तीन लोक वर-नंद, विमल-जिन विमल विमलकर | थाप...
विवरण खोलें →(पूजन विधि निर्देश) (छन्द कवित्त) पुष्पोत्तर तजि नगर-अजुध्या जनम लियो सूर्या-उर आय | सिंघसेन-नृप के नंदन, आनंद अशेष भरे जगराय || गुन-अंनत भगवंत धरे, भ...
विवरण खोलें →(पूजन विधि निर्देश) (माधवी तथा किरीट छन्द) तज के सर्वारथ-सिद्धि विमान, सुभानु के आनि आनंद बढ़ाये। जगमात सुव्रति के नंदन होय, भवोदधि-डूबत जंतु कढ़ाये...
विवरण खोलें →(पूजन विधि निर्देश) या भव-कानन में चतुरानन, पाप-पनानन घेरि हमेरी। आतम-जानन मानन ठानन, बान न होन दर्इ सठ मेरी।। तामद भानन आपहि हो, यह छान न आन न आनन टे...
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