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पाठ

श्री पद्मप्रभ-जिन पूजा

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“ॐ ह्रीं फाल्गुनकृष्ण-चतुर्थीदिने मोक्षमंगल-प्राप्ताय श्रीपद्मप्रभजिनेन्द्राय स्वाहा ।५।”

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श्री पुष्पदंत-जिन पूजा

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“ॐ ह्रीं फाल्गुनकृष्ण-नवम्यां गर्भमंगल-प्राप्ताय श्रीपुष्पदंतजिनेन्द्राय अर्घ्यं निर्वपामीति स्वाहा ।१।”

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श्री मुनिसुव्रतनाथ-जिन पूजा

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“ॐ ह्रीं श्रावणकृष्ण-द्वितीयायां गर्भमंगल-मंडिताय श्रीमुनिसुव्रतनाथजिनेन्द्राय अर्घ्यं निर्वपामीति स्वाहा”

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श्री नमिनाथ-जिन पूजा

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“ॐ ह्रीं आश्विनकृष्ण-द्वितीयायां गर्भमंगल-प्राप्ताय श्रीनमिनाथजिनेन्द्राय अर्घ्यं निर्वपामीति स्वाहा ।१।”

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भक्तामर-स्तोत्र

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“परिचय : यह सुप्रसिद्ध स्तोत्र है। क्रुद्ध नृपति द्वारा आचार्य मानतुंग को बलपूर्वक पकड़वा कर 48 तालों के अंदर बंद करवा दिया गया था। उस समय धर्म की रक्षा और प्रभावना हेतु आचार्यश्री ने भगवान् आदिनाथ की इस भक्ति-स्तुति की रचना की थी, जिस से 48 ताले स्वयं टूट गये…”

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विषापहार स्तोत्र (हिंदी अनुवाद)

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“इस विषापहार-स्तोत्र में भगवान् ऋषभदेव की स्तुति है। यह स्तुति गंभीर, प्रौढ़ और अनूठी उक्तियों से भरपूर है। यह ग्रन्थ कवि की चतुरार्इ से भरा हुआ है। हृदय-समुद्र को मथकर निकाला हुआ अमृत है। इसमें शब्दों का माधुर्य एवं अर्थों का गांभीर्य देखने को मिलता है। इस काव…”

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