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190 परिणाम “णमोकार” के लिए

पाठ

तीर्थराज सम्मेदशिखर वंदना-क्रम

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“यहाँ से इस अवसर्पिणी-काल में भगवान् आदिनाथ जी, वासुपूज्य जी, नेमिनाथ जी एवं भगवान् महावीर स्वामी को छोड़कर शेष बीस तीर्थंकर मोक्ष पधारे हैं। इस वंदना में टोंकों का दर्शन-क्रम इस प्रकार है :-”

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भक्ष्य-अभक्ष्य

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“(3) जिसको खाने से प्रमाद या नशा-विकार बढ़ता है, वह ‘प्रमादकारक अभक्ष्य’ है। जैसे- शराब, भांग, तम्बाकू, गांजा और अफीम आदि नशीली चीजें। ये स्वास्थ्य के लिए भी हानिकारक हैं”

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जैनियों के खाने-योग्य फल एवं साग-भाजी की सूची

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“साग भाजी:– मेथी, गवारफली, फूट, करौंदा, टींट, इमली, घिया, तोरी, टिंडा, भिंडी, सीताफल, पेठा, लोबिया, सरसों का साग, चने का साग, पेठा (मिठार्इ वाला), धनिया, पुदीना, लेहसवा, फरांसबीन, सेम, टमाटर, पालक, मिर्च, सोयाबीन, करेला, कचरी, मोंगरी, बथुआ, परमल, मटर, मकर्इ, भु…”

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पंच- कल्याणक तिथियाँ

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“तीर्थंकर का नाम तिथि एवं कल्याणक का नाम के क्रम से निम्नलिखित विवरण को समझें”

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पूजा संग्रह
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चैत्य-चैत्यालय निर्माण : वास्तु-विचार

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“९. मूलनायक-प्रतिमा, प्रतिष्ठाकारक, नगर एवं तीर्थंकर की राशि का मिलान करके ही निश्चित करें”

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जैन ज्ञान
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ग्यारह-प्रतिमा-व्रत क्रम

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“मुनिराज पूर्ण रत्नत्रय का पालन करते हुए साक्षात् नर से नारायण बनकर हमेशा-हमेशा के लिए मोक्ष सुख,परमानन्द के साथ आत्मगुणों से पूर्ण हो जाते हैं”

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जैन ज्ञान
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जैन-धर्म-दर्शन की सामान्य प्रवृतियाँ

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“तीर्थंकर भगवान के गर्भ, जन्म, दीक्षा, केवलज्ञान एवं निर्वाण इन पांच कल्याणकों के समय देवताओं द्वारा पूजा और प्रभावना की जाती है”

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जैन ज्ञान
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