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190 परिणाम “णमोकार” के लिए

पाठ अनुमति प्राप्त

समस्त जैन अर्घ्यावली — महार्घ्य, शांतिपाठ एवं विसर्जन

परंपरागत दिगम्बर जैन पूजा-पाठ

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“॥ 02. विद्यमान बीस तीर्थंकरों का अर्घ्य ॥”

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अर्घ्य संग्रह
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विनयपाठ

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“पूजा प्रारम्भ करते समय नौ बार णमोकार मंत्र पढ़कर, विनय पाठ और मंगल पाठ बोलकर पूजा प्रारम्भ करनी चाहिए”

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चैत्य-भक्ति

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“जाव अरिहंताणं भगवंताणं णमोकारं पज्जुवासं करेमि,”

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स्तोत्र संग्रह
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शांति-पाठ

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“(कायोत्सर्गपूर्वक नौ बार णमोकार-मंत्र का जाप करें।।)”

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समुच्चय पूजा

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“श्री देव-शास्त्र-गुरु,श्री विद्यमान बीस तीर्थंकर, श्री अनंतानंत सिद्ध परमेष्ठी समूह”

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पूजा संग्रह
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पाठ

अभिषेक पाठ

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“अथ पौर्वाह्णिक/मध्याह्निक/अपराह्णिक-देववन्दनायां पूर्वाचार्यानुक्रमेण सकल-कर्म-क्षयार्थं”

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पाठ संग्रह
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पाठ स्रोत संदर्भित

पंच परमेष्ठी: परिचय और अर्थ

JainSudha सम्पादकीय सार

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“पंच परमेष्ठी किसी एक व्यक्ति के पाँच नाम नहीं, बल्कि आध्यात्मिक उत्कृष्टता के पाँच पद हैं। णमोकार मंत्र में इन्हीं पदों को नमस्कार किया जाता है।”

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जैन ज्ञान
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पाठ

भारतवर्ष के प्रमुख जैन तीर्थ-क्षेत्र

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“सम्मेद-शिखर सिद्धक्षेत्र – र्इस्टर्न रेलवे के पारसनाथ स्टेशन से १४ मील (२२ कि.मी.) तथा गिरीडीह स्टेशन से पहाड़ की तलहटी मधुवन १८ मील (३० कि.मी.) है। इस क्षेत्र से भूतकाल में अनंतों तथा वर्तमान अवसर्पिणी काल में २० तीर्थंकर एवं असंख्यात-मुनि मोक्ष गये हैं। पहाड…”

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जैन ज्ञान
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पाठ

सल्लेखना का स्वरूप

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“इसमें मुनि व श्रावक दोनों ही क्रम-क्रम से आहार-पानी का त्याग करते हुए णमोकार मंत्र का जाप्य करते हुए शरीर को छोड़ते हैं”

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पूजा संग्रह
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