समस्त जैन अर्घ्यावली — महार्घ्य, शांतिपाठ एवं विसर्जन
परंपरागत दिगम्बर जैन पूजा-पाठ
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“॥ 02. विद्यमान बीस तीर्थंकरों का अर्घ्य ॥”
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190 परिणाम “णमोकार” के लिए
परंपरागत दिगम्बर जैन पूजा-पाठ
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“॥ 02. विद्यमान बीस तीर्थंकरों का अर्घ्य ॥”
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“पंचम चक्रवर्ति पदधारी, सोलम तीर्थंकर सुखकारी।”
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“अपराजित व अनादि है, णमोकार शुभ मंत्र।।२।।”
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“पूजा प्रारम्भ करते समय नौ बार णमोकार मंत्र पढ़कर, विनय पाठ और मंगल पाठ बोलकर पूजा प्रारम्भ करनी चाहिए”
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“जाव अरिहंताणं भगवंताणं णमोकारं पज्जुवासं करेमि,”
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“(कायोत्सर्गपूर्वक नौ बार णमोकार-मंत्र का जाप करें।।)”
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“श्री देव-शास्त्र-गुरु,श्री विद्यमान बीस तीर्थंकर, श्री अनंतानंत सिद्ध परमेष्ठी समूह”
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“निज पर का भेद जानकर मैं, निज को ही निज में लीन करूँ”
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“पंचम-चक्रवर्ति-पदधारी, सोलम-तीर्थंकर सुखकारी”
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“महासुगंधित पुष्प मनोहर, चुन-चुनकर ले आयें”
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“णमोकार मंत्राक्षरों को जजूँ मैं”
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“अथ पौर्वाह्रिक देववंदनायां पूर्वाचार्यानुक्रमेण सकलकर्मक्षयार्थं भावपूजा-”
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“अथ पौर्वाह्णिक/मध्याह्निक/अपराह्णिक-देववन्दनायां पूर्वाचार्यानुक्रमेण सकल-कर्म-क्षयार्थं”
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“आदि तीर्थंकर ऋषभदेव का, समवशरण मन भाया था ।”
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“पंच परमेष्ठी किसी एक व्यक्ति के पाँच नाम नहीं, बल्कि आध्यात्मिक उत्कृष्टता के पाँच पद हैं। णमोकार मंत्र में इन्हीं पदों को नमस्कार किया जाता है।”
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“जलते लखि नागिन-नाग दोय, णमोकार सुन गये देव होय”
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“सम्मेद-शिखर सिद्धक्षेत्र – र्इस्टर्न रेलवे के पारसनाथ स्टेशन से १४ मील (२२ कि.मी.) तथा गिरीडीह स्टेशन से पहाड़ की तलहटी मधुवन १८ मील (३० कि.मी.) है। इस क्षेत्र से भूतकाल में अनंतों तथा वर्तमान अवसर्पिणी काल में २० तीर्थंकर एवं असंख्यात-मुनि मोक्ष गये हैं। पहाड…”
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“इसमें मुनि व श्रावक दोनों ही क्रम-क्रम से आहार-पानी का त्याग करते हुए णमोकार मंत्र का जाप्य करते हुए शरीर को छोड़ते हैं”
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विवरण खोलें →Nemichandra Shastri
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विवरण खोलें →Mohanlal Bolya
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विवरण खोलें →Ratanchand Bharilla
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विवरण खोलें →Shripal Jain and Others
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विवरण खोलें →Ravindra Jain, Kusum Jain
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विवरण खोलें →Hukamchand Bharilla, Yashpal Jain
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विवरण खोलें →Ravindra Jain
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विवरण खोलें →जैन परंपरा का मूल मंगल मंत्र।
विवरण खोलें →आचार्य उमास्वामी (उमास्वाति)
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“वर्तनापरिणामक्रियाः परत्वापरत्वे च कालस्य।।”
विवरण खोलें →आचार्य अमृतचन्द्र
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“एवम् अयं कर्मकृतैर् भावैर् असमाहितोऽपि युक्त इव ।”
विवरण खोलें →कविश्री चंद्र
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“तुम जग में सर्वज्ञ कहाओ, छट्ठे तीर्थंकर कहलाओ।”
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