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पंच परमेष्ठी: परिचय और अर्थ

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णमोकार मंत्र में नमस्कार किये जाने वाले पाँच परम पदों का सरल अर्थ।

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पंच परमेष्ठी किसी एक व्यक्ति के पाँच नाम नहीं, बल्कि आध्यात्मिक उत्कृष्टता के पाँच पद हैं। णमोकार मंत्र में इन्हीं पदों को नमस्कार किया जाता है।

१. अरिहन्त
जिन्होंने घातिया कर्मों और आन्तरिक शत्रुओं पर विजय पाकर केवलज्ञान प्राप्त किया है और जीवों को मार्ग बताते हैं। तीर्थंकर अरिहन्त चार प्रकार के संघ की स्थापना करते हैं।

२. सिद्ध
जिनकी आत्मा सभी कर्मों से मुक्त होकर सिद्ध अवस्था में स्थित है। सिद्ध शरीर, जन्म और मृत्यु से परे मुक्त आत्माएँ हैं।

३. आचार्य
मुनि-संघ के प्रमुख, जो आचार की रक्षा, व्यवस्था और मार्गदर्शन करते हैं। उनका पद अनुशासन और उदाहरण से जुड़ा है।

४. उपाध्याय
आगम और सिद्धान्त के अध्यापक, जो साधु-संघ को अध्ययन कराते हैं। यह पद स्वाध्याय और ज्ञान-परम्परा का प्रतीक है।

५. साधु
संयम और आत्मशुद्धि के मार्ग पर चलने वाले श्रमण। दिगम्बर परम्परा में मुनि, आर्यिका तथा त्याग के अन्य मान्य क्रम साधना से जुड़े हैं।

णमोकार मंत्र में किसी सांसारिक वरदान की याचना नहीं है। इसमें गुण और पद को नमस्कार किया जाता है; इसलिए इसे गुणानुवाद और आत्मोन्नति की प्रेरणा के रूप में समझा जाता है।

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