JainSudha संग्रह

आरती संग्रह

जिनेन्द्र, पंच परमेष्ठी और सिद्धचक्र से संबंधित आरतियाँ तथा स्रोत-संदर्भ

17 सामग्री

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वीर-प्रभु की आरती

ओं जय सन्मति-देवा, प्रभु जय सन्मति-देवा | वीर महा-अतिवीर, प्रभु जी वर्द्धमान-देवा || ओं जय सन्मति देवा ! त्रिशला-उर अवतार लिया, प्रभु सुर-नर...

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आरती : पंच-परमेष्ठी

कविश्री द्यानतराय (चौपार्इ) इह विधि मंगल आरति कीजे, पंच परमपद भज सुख लीजे | इह विधि मंगल आरति कीजे, पंच परमपद भज सुख लीजे पहली आरति श्रीजिनर...

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आरती श्री जिनराज की

कविश्री द्यानतराय आरती श्रीजिनराज तिहारी, करम दलन संतन हितकारी | सुर नर असुर करत तुम सेवा, तुमही सब देवन के देवा | आरती श्रीजिनराज तिहारी, क...

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आरती चौबीस भगवान् की

ऋषभ अजित संभव अभिनंदन, सुमति पद्म सुपार्श्व की जय | महाराज की श्रीजिनराज की, दीनदयाल की आरती की जय | चंद्र पुष्प शीतल श्रेयांस, वासुपूज्य मह...

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आरती भगवान् आदिनाथ (चांदखेड़ी) की

कविश्री नमजी जगमग जगमग आरती कीजे, आदीश्वर भगवान् की | जगमग जगमग आरती कीजे, आदीश्वर भगवान् की || प्रथमदेव अवतारी प्यारे, तीर्थंकर गुणवान की |...

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आरती : शब्दार्थ और संक्षिप्त व्याख्या

आरती शब्द का अर्थ :निरंजन, मनोरथ, कामना, इच्छा, विनती | इष्ट-मूर्ति के समक्ष, श्रद्धाभाव पूर्वक, दीपज्योति आदि का विधिवत चक्रायण-विधि से आवर...

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आरती श्री चंद्रप्रभ जिन (तिजारा)

म्हारा चंद्रप्रभ जी की सुन्दर मूरत, म्हारे मन भार्इ जी || म्हारे मन भार्इ जी, म्हारे मन भार्इ जी | म्हारा चंद्रप्रभ जी की सुन्दर मूरत, म्हार...

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आरती श्री मुनिसुव्रतनाथजी (पैठण)

ॐ जय मुनिसुव्रतस्वामी, प्रभु जय मुनिसुव्रत स्वामी | भक्ति भाव से प्रणमूँ, भक्ति भाव से प्रणमूँ || जय अंतरयामी, ॐ जय मुनिसुव्रतस्वामी || राजग...

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आरती श्री पार्श्वनाथ जी

ॐ जय पारस देवा, स्वामी जय पारस देवा | सुर नर मुनिजन तुम चरणन की, करते नित सेवा | पौष वदी ग्यारस काशी में, आनंद अतिभारी-2, अश्वसेन वामा माता...

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आरती श्री महावीर प्रभु

ॐ जय सन्मति देवा, प्रभु! जय सन्मति देवा | वर्द्धमान महावीर वीर अति-2, जय संकट छेवा || ॐ जय सन्मति देवा || सिद्धारथ नृप नंद दुलारे, त्रिशला क...

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आरती श्री वर्द्धमान स्वामी

करूं आरती वर्द्धमान की,पावापुर निरवान थान की | राग बिना सब जगजन तारे, द्वेष बिना सब कर्म विदारे || करूं आरती वर्द्धमान की,पावापुर निरवान थान...

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आरती श्री महावीर प्रभु (चाँदनपुर)

जय महावीर प्रभो, स्वामी जय महावीर प्रभो | कुंडलपुर अवतारी-2, त्रिशलानंद विभो || ॐ जय महावीर प्रभो || सिद्धारथ घर जन्मे, वैभव था भारी-2, बाल...

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आरती श्री पार्श्वनाथजी (बड़ागांव

ॐ जय पारस देवा, स्वामी जय पारस देवा | आरति हम सब करते-2, मिले मुक्ति मेवा || बड़ागांव टीले से, स्वप्न दिया तुमने-2 | चमत्कार कर प्रगटे-2, शर...

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श्री सिद्धचक्र की आरती

कवि पं. मक्खनलाल जय सिद्धचक्र देवा, जय सिद्धचक्र देवा | करत तुम्हारी निश-दिन, मन से सुर-नर-मुनि सेवा | जय सिद्धचक्र देवा | ज्ञानावरणी दर्शना...

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