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111 परिणाम “पाठ” के लिए

पाठ

विषापहार स्तोत्र (हिंदी अनुवाद)

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“…ठ बैठा । इससे धर्म की अपूर्व-प्रभावना हुर्इ। श्रद्धा और मनोयोग-पूर्वक इसके पाठ से सुख-शांति मिलती है और सारे मनोरथ पूर्ण होते हैं।”

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सामायिक पाठ : काल-अनंत भ्रम्यो

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“(इसके आदि या अंत में ‘आलोचना-पाठ’ बोलकर फिर तीसरे सामायिक भाव-कर्म का पाठ करना चाहिए।)”

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नवग्रहों के जाप्य

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“(अभिषेक, पूजन-विधान के बाद इन जाप्यों को जपना चाहिए। फिर शांतिपाठ, विसर्जन करें।)”

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श्री वीर-निर्वाणोत्सव : दीपावली-पूजन

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“दीपमालिका के दिन प्रात:काल उठकर सामायिक, स्तुतिपाठ कर, शौच-स्नानादि से निवृत्त हो श्री जैनमंदिर में पूजन करनी चाहिए और निर्वाणकल्याणक (पृष्ठ 53), निर्वाणक्षेत्र-पूजा (पृष्ठ 312, 321), निर्वाणकांड (पृष्ठ 396), महावीराष्टक (पृष्ठ 577) बोलकर निर्वाणलड्डू चढ़ाना च…”

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अथ अठार्इ रासा

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“इन दिनों में पूजन पाठ तथा सिद्धचक्र विधान करने का महान् फल है।”

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तत्त्वार्थसूत्रम् — मूल संस्कृत पाठ

आचार्य उमास्वामी (उमास्वाति)

आचार्य उमास्वामी (उमास्वाति) विरचित तत्त्वार्थसूत्र के दस अध्यायों का पूर्ण, अनुभागबद्ध और खोजयोग्य संस्कृत पाठ।

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पुरुषार्थसिद्ध्युपाय — मूल संस्कृत पाठ

आचार्य अमृतचन्द्र

आचार्य अमृतचन्द्र विरचित पुरुषार्थसिद्ध्युपाय (जिनप्रवचनरहस्यकोष) के 226 श्लोकों का पूर्ण, अनुभागबद्ध और खोजयोग्य मूल संस्कृत पाठ।

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मंगलपाठ

मंगल मूर्ति परम पद, पंच धरौं नित ध्यान | हरो अमंगल विश्व का, मंगलमय भगवान |१| मंगल जिनवर पद नमौं, मंगल अरिहन्त देव | मंगलकारी सिद्ध पद, सो वन्दौं स्वय...

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दर्शन पाठ

कविश्री बुधजन (दोहा) तुम निरखत मुझको मिली, मेरी सम्पत्ति आज | कहाँ चक्रवर्ति-संपदा, कहाँ स्वर्ग-साम्राज ||१|| तुम वंदत जिनदेवजी, नित-नव मंगल होय | विघ...

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शांति-पाठ

कवि श्री जुगलकिशोर शास्त्रोक्त-विधि पूजा-महोत्सव सुरपती चक्री करें | हम सारिखे लघु-पुरुष कैसे यथाविधि पूजा करें || धन-क्रिया-ज्ञानरहित न जानें रीति-पू...

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विसर्जन-पाठ (संस्कृत)

ज्ञानतोऽज्ञानतो वापि शास्त्रोक्तं न कृतं मया | तत्सर्वं पूर्णमेवास्तु त्वत्प्रसादाज्जिनेश्वर ||१|| आह्वाननं नैव जानामि नैव जानामि पूजनम् | विसर्जनं न...

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शांति पाठ (हिन्दी)

(अर्थ रहित) (अर्थ सहित) (अर्थ रहित) शांतिनाथ ! मुख शशि-उनहारी, शील-गुण-व्रत, संयमधारी | लखन एकसौ-आठ विराजें, निरखत नयन-कमल-दल लाजें ||१|| अर्थ- हे शां...

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विसर्जन-पाठ (हिन्दी)

बिन जाने या जान के, रही टूट जो कोय | तुम प्रसाद से परम गुरु, सो सब पूरन होय || पूजन विधि जानूँ नहीं, नहिं जानूँ आह्वान | और विसर्जन भी नहीं, क्षमा करो...

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प्रतिमा-प्रक्षाल-विधि पाठ

(दोहा) परिणामों की स्वच्छता, के निमित्त जिनबिम्ब | इसीलिए मैं निरखता, इनमें निज-प्रतिबिम्ब || पंच-प्रभू के चरण में, वंदन करूँ त्रिकाल | निर्मल-जल से क...

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सामायिक पाठ : नित देव! मेरी…

श्री अमितगति-सूरि-विरचित ‘परमात्म-द्वात्रिंशतिका’ का पद्यानुवाद कविश्री रामचरित उपाध्याय नित देव! मेरी आत्मा, धारण करे इस नेम को, मैत्री करे सब प्राणि...

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आलोचना-पाठ

कविश्री जौहरी (दोहा) वंदूं पाँचों परम-गुरु, चौबीसों जिनराज | करूँ शुद्ध आलोचना, शुद्धि-करन के काज ||१|| (सखी छन्द) सुनिये जिन! अरज हमारी, हम दोष किये...

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लघु समाधिमरण-पाठ

कविश्री द्यानतराय गौतमस्वामी वंदूं नामी, मरणसमाधि भला है | मैं कब पाऊँ निशदिन ध्याऊँ, गाऊँ वचन-कला है || देव-धर्म-गुरु प्रीति महा दृढ़, सप्त-व्यसन नहि...

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दर्शन-पाठ

कविवर पं. दौलतराम (दोहा) सकल-ज्ञेय-ज्ञायक तदपि, निजानंद-रस-लीन | सो जिनेन्द्र जयवंत नित, अरि-रज-रहस-विहीन || जय वीतराग-विज्ञान पूर, जय मोह, तिमिर को ह...

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वृहत् शांतिधारा पाठ

ॐ ह्रीं श्रीं क्लीं ऐं अर्हं वं मं हं सं तं पं वंवं मंमं हंहं संसं तंतं पंपं झंझं झ्वीं झ्वीं क्ष्वीं क्ष्वीं द्रां द्रां द्रीं द्रीं द्रावय-द्रावय नम...

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