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209 परिणाम “पूजा” के लिए

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चतुर्विंशति तीर्थंकर स्वस्ति मंगल विधान

श्री वृषभो न: स्वस्ति, स्वस्ति श्री अजित:| श्री संभव: स्वस्ति, स्वस्ति श्री अभिनंदन:| श्री सुमति: स्वस्ति, स्वस्ति श्री पद्मप्रभ:| श्री सुपार्श्वः स्व...

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अथ परमर्षि स्वस्ति मंगल विधान

(इस विधान में परम–ऋषियों (परमेष्ठियों) में प्रकट आत्मा की चौंसठ (64) ऋद्धियों का स्मरण कर पुष्प–क्षेपण किया गया है। ऋद्धि का अर्थ आत्मा की वह शक्ति है...

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तीस चौबीसी का अर्घ्य

द्रव्य आठों जु लीना है, अर्घ्य कर में नवीना है। पूजतां पाप छीना है, ‘भानुमल’ जोर कीना है।। द्वीप अढ़ार्इ सरस राजै, क्षेत्र दश ता-विषै छाजें। सात शत बी...

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गौतम स्वामी जी का अर्घ्य

(पूर्ण-पूजन हेतु पृष्ठ 384 देखें) गौतमादिक सर्वे एकदश गणधरा | वीर जिन के मुनि सहस चौदह वरा || नीर गंधाक्षतं पुष्प चरु दीपकं | धूप फल अर्घ्य ले हम जजें...

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अंतराय-नाशार्थ अर्घ्य

लाभ में अंतराय के वश जीव सुख ना लहे | जो करे कष्ट-उत्पात सगरे कर्मवश विरथा रहे || नहिं जोर वा को चले इक-छिन दीन सो जग में फिरे | अरिहंत-सिद्ध सु अधर-ध...

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श्री पार्श्वनाथ जिन पूजन (बड़ागाँव)

आचार्य श्री विद्याभूषण सन्मतिसागर जी (पूजन विधि निर्देश) (गीतिका छन्द) किया नहिं बैर कमठासुर, क्षमा वसुधा सुहार्इ है | जगी करुणा अमल हृदय, नाग-नागिन द...

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तत्त्वार्थसूत्रम् (मोक्षशास्त्रम्)

आचार्य उमास्वामी मोक्षमार्गस्य नेतारं भेत्तारं कर्मभूभृताम् । ज्ञातारं विश्वतत्त्वानां वंदे तद्गुणलब्धये || त्रैकाल्यं द्रव्य-षट्कं नव-पद-सहितं जीव-षट...

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पंच- कल्याणक तिथियाँ

महीनों के क्रम से पंच- कल्याणक तिथियाँ श्रावकगण नीचे लिखे दिनों में अवश्य पूजन एवं स्वाध्याय करें, क्योंकि ऐसा करने से विशेष-पुण्य व लाभ की प्राप्ति ह...

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पंच कल्याणक तिथि (चार्ट)

श्री चौबीस तीर्थंकरों की पंच कल्याणक तिथियाँ हर एक श्रावक नीचे लिखे दिनों में कल्याणक पाठ सहित पूजन और स्वाध्याय जरूर करें | इससे अतिशय पुण्य और लाभ क...

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संक्षिप्त सूतक-अवधि-विचार

सूतक में देव-शास्त्र-गुरु का पूजन-प्रक्षालादि तथा मंदिर जी की जाजम-वस्त्रादि को स्पर्श नहीं करना चाहिये। सूतक का समय पूर्ण हुए बाद पूजनादि, सत्पात्र-द...

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सल्लेखना का स्वरूप

प्रतिकार-रहित उपसर्ग आने पर, दुष्काल होने पर, बुढ़ापा अथवा रोग विशेष के हो जाने पर, रत्नत्रय धर्म की आराधना करते हुये शरीर का त्याग करना सल्लेखना है |...

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