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पुरुषार्थसिद्ध्युपाय — मूल संस्कृत पाठ
आचार्य अमृतचन्द्र
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“निरतः कार्स्त्न्यनिवृत्तौ भवति यतिः समयसारभूतोऽयम् ।”
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8 परिणाम “समयसार” के लिए
आचार्य अमृतचन्द्र
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“निरतः कार्स्त्न्यनिवृत्तौ भवति यतिः समयसारभूतोऽयम् ।”
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“असम – समयसारं चारु – चैतन्य – चिह्नम्”
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“समयसार-सुपुष्प-सुमालया, सहज-कर्म-करेण विशोधया”
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“निज समयसार की सुमन माल ही कामव्यथा सारी खोती”
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“संतापहरण सुखकरण सार, शुद्धात्मस्वरूपी समयसार”
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“‘समयसार’ में परमातम, बनने का साधन-सार भरा”
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“अन्य ग्रन्थ – रत्नकरंडश्रावकाचार, पुरुषार्थसिद्धयुपाय, परमात्म प्रकाश, प्रवचनसार, पंचास्तिकाय, समयसार, पंचाध्यायी, रयणसार आदि ।”
पढ़ें →महाकवि धनपाल
मिलती हुई पंक्ति
“तब समयसरोभ्रष्टा नगन्ति सकलासु रू(घ)क्षजातिपु ।”
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