स्तुति : प्रभु पतित-पावन
कविश्री बुधजन प्रभु पतित-पावन मैं अपावन, चरण आयो सरन जी | यो विरद आप निहार स्वामी, मेटो जामन मरन जी ||१|| तुम ना पिछान्या आन मान्या, देव विव...
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प्राकृत, संस्कृत और हिन्दी स्तोत्र, स्तुति तथा भक्ति-पाठ
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कविश्री बुधजन प्रभु पतित-पावन मैं अपावन, चरण आयो सरन जी | यो विरद आप निहार स्वामी, मेटो जामन मरन जी ||१|| तुम ना पिछान्या आन मान्या, देव विव...
विवरण खोलें →(शार्दूलविक्रीड़ित छन्द) श्री पंचपरमेष्ठी वंदन अरिहन्तो-भगवन्त इन्द्रमहिता: सिद्धाश्च सिद्धीश्वरा:, आचार्या: जिनशासनोन्नतिकरा: पूज्या उपाध्या...
विवरण खोलें →आचार्यश्री आनंदसागर ‘मौनप्रिय’ (ध्वनि : आचार्यश्री आनंदसागर ‘मौनप्रिय’) (गीता छन्द) श्री पंचपरमेष्ठी वंदन अरिहन्त हैं भगवन्त पूजित इन्द्र, श...
विवरण खोलें →दर्शनं देवदेवस्य, दर्शनं पापनाशनम् | दर्शनं स्वर्गसोपानं, दर्शनं मोक्षसाधनम् ||१|| दर्शनेन जिनेन्द्राणां, साधूनां वंदनेन च | न चिरं तिष्ठते...
विवरण खोलें →(बोलते समय पुष्पांजलि क्षेपण करें) इच्छामि भंते! चेइयभत्ति काउसग्गो कओ, तस्सालोचेउं अहलोय-तिरियलोय-उड्ढलोयम्मि किट्टिमाकिट्टिमाणि जाणि जिणचे...
विवरण खोलें →(गीता छन्द) तुम तरणतारण भव-निवारण, भविक-मन आनंदनो | श्री नाभिनंदन जगतवंदन, आदिनाथ निरंजनो ||१|| तुम आदिनाथ अनादि सेऊँ, सेय पद-पूजा करूँ | कै...
विवरण खोलें →(चौपाई छन्द) मैं तुम चरण-कमल गुणगाय, बहुविधि-भक्ति करूं मनलाय | जनम-जनम प्रभु पाऊँ तोहि, यह सेवाफल दीजे मोहि ||१|| कृपा तिहारी ऐसी होय, जामन...
विवरण खोलें →मूल (संस्कृत) रचना :आचार्य समंतभद्र भाषा (हिन्दी) अनुवाद : कविश्री द्यानतराय विद्वानों, योगियों और त्यागी-तपस्वियों के स्वामी आचार्य समंतभद्...
विवरण खोलें →आचार्य भद्रबाहु जिन व्यक्तियों की कुंडली में कालसर्प योग हो उसे उपसर्ग-हर स्तोत्र का पाठ, इस दोष को शांत कर जीवन में आशातीत सफलता दिलाता है...
विवरण खोलें →आचार्य भद्रबाहु स्वामी जगद्गुरुं नमस्कृत्यं, श्रुत्वा सद्गुरुभाषितम् | ग्रहशांतिं प्रवचयामि, लोकानां सुखहेतवे || जिनेन्द्रा: खेचरा ज्ञेया, प...
विवरण खोलें →हिन्दी भावानुवाद : आर्यिका चंदनामती (प्रात:काल इस स्तोत्र का पाठ करने से क्रूरग्रह अपना असर नहीं करते। किसी ग्रह के असर होने पर 27 दिन तक प्...
विवरण खोलें →श्रीमद् भगवद् जिनसेनाचार्य कृत स्वयंभुवे नमस्तुभ्यमुत्पाद्यात्मानमात्मनि | स्वात्मनैव तथोद्भूतवृत्तयेऽचिन्त्यवृत्तये ||१|| नमस्ते जगतां पत्य...
विवरण खोलें →आद्यंताक्षरसंलक्ष्यमक्षरं व्याप्य यत्स्थितम् | अग्निज्वालासमं नादं बिन्दुरेखासमन्वितम् ||१|| अग्निज्वाला-समाक्रान्तं मनोमल-विशोधनम् | दैदीप्...
विवरण खोलें →आचार्य श्री मानतुंग स्वामी परिचय : यह सुप्रसिद्ध स्तोत्र है। क्रुद्ध नृपति द्वारा आचार्य मानतुंग को बलपूर्वक पकड़वा कर 48 तालों के अंदर बंद...
विवरण खोलें →पं. हीरालाल जैन ‘कौशल’ श्री भक्तामर का पाठ, करो नित प्रात, भक्ति मन लार्इ | सब संकट जायँ नशार्इ || जो ज्ञान-मान-मतवारे थे, मुनि मानतुङ्ग से...
विवरण खोलें →कविश्री पं. हेमराज (दोहा) आदिपुरुष आदीश जिन, आदि सुविधि करतार | धरम-धुरंधर परमगुरु, नमूं आदि अवतार || (चौपार्इ छन्द) सुर-नत-मुकुट रतन-छवि कर...
विवरण खोलें →कविश्री भागचंद्र (शिखरिणी छन्द) यदीये चैतन्ये मुकुर इव भावाश्चिदचित:, समं भान्ति ध्रौव्य-व्यय-जनि-लसन्तो·न्तरहिता: | जगत्साक्षी मार्ग-प्रकटन...
विवरण खोलें →कविश्री बनारसीदास संस्कृत भाषा में कल्याण-मंदिर-स्तोत्र के रचयिता श्री कुमुदचंद्राचार्य हैं। इसमें भगवान् पार्श्वनाथ की स्तुति होने से इसका...
विवरण खोलें →कविश्री भूध्ररदास “बंदा, सागर, मध्य प्रदेश की “ब्रह्मचारिणी कल्पना दीदी” द्वारा गायन एकीभाव संस्कृत-स्तोत्र के रचयिता आचार्य श्री वादिराज है...
विवरण खोलें →कविश्री शांतिदास संस्कृत रचना ‘विषापहार स्तोत्र’ के रचयिता ‘महाकवि धनञ्जय’ सुप्रसिद्ध द्विसंधान काव्यशैली के कर्ता थे। इस शैली के प्रत्येक प...
विवरण खोलें →कविश्री भूधरदास ते गुरु मेरे मन बसो, जे भवजलधि जहाज | आप तिरें पर तारहीं, ऐसे श्री ऋषिराज | ते गुरु मेरे मन बसो, जे भवजलधि जहाज ||१|| मोह-मह...
विवरण खोलें →कविश्री भूधरदास अहो! जगत्-गुरुदेव! सुनिये अरज हमारी | तुम प्रभु दीनदयाल, मैं दु:खिया संसारी ||१|| इस भव-वन के माँहिं, काल-अनादि गमायो | भ्रम...
विवरण खोलें →कविश्री द्यानतराय नरेन्द्रं फणीन्द्रं सुरेन्द्रं अधीशं, शतेन्द्रं सु पूजें भजें नाय-शीशं | मुनीन्द्रं गणीन्द्रं नमें जोड़ि हाथं, नमो देव-देव...
विवरण खोलें →कविश्री मनोहरलाल वर्णी ’सहजानंद’ मेरे शाश्वत-शरण, सत्य-तारणतरण ब्रह्म प्यारे | तेरी भक्ति में क्षण जायें सारे || टेक|| ज्ञान से ज्ञान में ज्...
विवरण खोलें →कविश्री पं. मक्खनलाल श्री सिद्धचक्र का पाठ करो, दिन आठ, ठाठ से प्रानी, फल पायो मैना रानी || मैना सुन्दरि इक नारी थी, कोढ़ी पति लख दु:खियारी...
विवरण खोलें →कविश्री ‘पंकज’ तुम से लागी लगन, ले लो अपनी शरण, पारस प्यारा | मेटो-मेटो जी संकट हमारा || निश-दिन तुमको जपूँ, पर से नेहा तजूँ | जीवन सारा, ते...
विवरण खोलें →(सवैया) वीर हिमाचल तें निकसी गुरु गौतम के मुख-कुंड ढरी है | मोह महाचल भेद चली, जग की जड़ आतप दूर करी है || ज्ञान-पयोनिधि-माँहि रली, बहु-भंग-...
विवरण खोलें →35 अक्षरों का मंत्र :- णमो अरिहंताणं, णमो सिद्धाणं, णमो आइरियाणं णमो उवज्झायाणं, णमो लोए सव्वसाहूणं || 16 अक्षरों का मंत्र :- अरिहंत सिद्ध आ...
विवरण खोलें →श्री जिनवर की आसिका, लीजे शीश चढ़ाय | भव-भव के पातक कटें, दु:ख दूर हो जाय || (जल बिन्दुओं से असिका पर बनाये स्वस्तिकादि मिटा कर इसे गंधोदक म...
विवरण खोलें →ॐ ह्रीं क्लीं श्रीं श्रीसूर्यग्रह-अरिष्टनिवारक श्रीपद्मप्रभजिनेन्द्राय नम: शांतिं कुरु-कुरु स्वाहा ।१। (७००० जाप्य) ॐ ह्रीं क्रौं श्रीं क्ली...
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