समस्त जैन अर्घ्यावली — महार्घ्य, शांतिपाठ एवं विसर्जन
परंपरागत दिगम्बर जैन पूजा-पाठ
मिलती हुई पंक्ति
“जैनागम का वह सुधा कलश जो बिखराते हैं गली-गली।”
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परंपरागत दिगम्बर जैन पूजा-पाठ
मिलती हुई पंक्ति
“जैनागम का वह सुधा कलश जो बिखराते हैं गली-गली।”
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“अन्तेन जयति जैनीनीतिर् मन्थाननेत्रम् इव गोपी ॥ २२५ ॥”
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“धर्मनाथ भगवान की जय हो, जैनधर्म की सदा विजय हो।।१।।”
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“दृष्टिवाद के पाँच भेद हैं, जिन्हें बताते जैन वेद हैं।।११।।”
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“लेकिन इसको सच न समझना, जैन दिगम्बर आगम पढ़ना।।२६।।”
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“जैनधर्म की जय जय गाया,सबने उसको था अपनाया”
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“लेखक—ब्र. पं. गणेशलाल नाथूलाल जी जैन, मांगीतुंगी”
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“हर घर के दरवाजे पर तुम, महामंत्र को लिखो जैनगण।।२३।।”
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“धर्म अहिंसा जगप्रधान है, जैनधर्म की बना शान है”
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“जैनधर्म प्राकृतिक धर्म है, शाश्वत और अनादिनिधन है।।१।।”
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“कुलधरणिधरोऽयं जैनचैत्याभिरामः ।”
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“श्रीमूलसंघ-सुदृशां सुकृतैकहेतुर्, जैनेन्द्र-यज्ञ-विधिरेष मयाऽभ्यधायि”
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“सब को छिन में जीत, जैन के मेरु खरे हैं”
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“अर्थ:- इन्द्रों द्वारा जिनकी पूजा की गई, ऐसे अरिहन्त भगवान्, सिद्ध-पद के स्वामी सिद्ध भगवान्, जिनशासन को समुन्नत करनेवाले आचार्य, जैन-सिद्धांत को सुव्यवस्थित पढ़ानेवाले उपाध्याय, रत्नत्रय के आराधक साधु, ये पाँचों परमेष्ठी प्रतिदिन मंगल करें।”
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“अनेकांतमय द्वादशांगी बखानी, नमौं लोकमाता श्री जैनवाणी”
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“विश्वधर्म यह तो सबका, जैनों का ही अधिकार नहीं”
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“सब मीणा गूजर जाट जैन, आकर पूजें कर तृप्त नैन”
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“जैनी जन पूजा रचत आन, कोर्इ छत्र चँवर के करत दान”
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“जुडें हजारों जैनी भार्इ, पूजन पाठ करें सुखदार्इ”
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“जैनी जन पूजा रचत आन, कोर्इ छत्र चँवर के करत दान”
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“श्री जैनवानी तत्त्वज्ञानी, भर्इ विषय-पयोगता”
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“…ं मैं आज्ञा सिद्ध हूँ, अधिक क्या कहूँ, सिद्ध सारस्वत हूँ और अब आपके सम्मुख जैन-वादी खड़ा है, जिसकी शक्ति हो मुझसे शास्त्रार्थ कर ले।”
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“जैनधर्म में शंक न आने, सो नि:शंकित गुण चित ठाने”
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“जिन व्यक्तियों की कुंडली में कालसर्प योग हो उसे उपसर्ग-हर स्तोत्र का पाठ, इस दोष को शांत कर जीवन में आशातीत सफलता दिलाता है, जैन-जैनेतर ग्रंथों में इसकी महत्ता है ।”
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“कविश्री कल्याणकुमार जैन ‘शशि’”
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“जैनेन्द्रं धर्मचक्रं, प्रभवतु सततं सर्वसौख्यप्रदायि”
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“प्रधानं सर्वधर्माणां जैनं जयतु शासनम्”
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“अरुणा जैन ‘भारती’”
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“कवियत्री अरुणा जैन ‘भारती’”
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“पं. हीरालाल जैन ‘कौशल’”
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