अथ श्री मंगलाष्टक स्तोत्रम्
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“श्रीसिद्धान्त-सुपाठका: मुनिवरा: रत्नत्रयाराधका:,”
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“श्रीसिद्धान्त-सुपाठका: मुनिवरा: रत्नत्रयाराधका:,”
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“आचार्य जिनशासन-प्रभावक, पूज्य पाठक ऋषिवरा”
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“(प्रतिदिन अवकाश न हो तो जिस कल्याणक का दिवस हो, उसका पाठ करें।)”
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“।।इति अभिषेक पाठ।।”
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“अज्ञानवश शास्त्रोक्त-विधि तें चूक कीनी पाठ में”
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“जुडें हजारों जैनी भार्इ, पूजन पाठ करें सुखदार्इ”
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“अरिहंत सिद्धाचार्य पाठक, साधु त्रिभुवन-वंद्य हैं”
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“एकादश-अंग पूर्व-चौदह के, पाठी गुण पच्चीस धार”
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“पंचम अंग उपधान बतावे, पाठ सहित तब बहु फल पावे”
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“पाँचों बालयतीन का, कीजे नितप्रति पाठ”
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“भद्रबाहु मुख जनित जो, सुनत कियो मुख पाठ”
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“जिन व्यक्तियों की कुंडली में कालसर्प योग हो उसे उपसर्ग-हर स्तोत्र का पाठ, इस दोष को शांत कर जीवन में आशातीत सफलता दिलाता है, जैन-जैनेतर ग्रंथों में इसकी महत्ता है ।”
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“(प्रात:काल इस स्तोत्र का पाठ करने से क्रूरग्रह अपना असर नहीं करते। किसी ग्रह”
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“अति ही सुख पावे, पाप नशावे, जो मन लावे पाठ पढ़े”
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“(शांति-पाठ व विसर्जन-पाठ संस्कृत या हिंदी दोनों में से कोई भी एक पढ़ने चाहिए)”
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“घर-घर पाठ करें नर-नारी, बच्चे भी कंठस्थ करें”
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“अरिहन्त सिद्धाचार्य पाठक, साधुओं की वंदना”
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“शिवमग-साधक साधु नमि, रच्यो पाठ सुखदाय”
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“जो बाँचे यह पाठ सरस संभव-तनो”
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“वह स्तोत्र जो आरती के समय पढ़ा गया अथवा पाठ किया गया है, “आरती” कहलाती है”
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“जग में पाठ अहिंसा, आपहि विस्तार्यो-2”
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“वर्धस्व-नन्द जय-पाठ-पदावलीभि:, कमलासने जिन भवंत-महं श्रयामि”
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“शुद्ध-उच्चारि सुर केर्इ पाठे फुरें”
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“वा अनुमोदन करें, करावे पढ़ें पाठ वर”
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“तिनकोपूजेजोभवि-प्रानी,पाठपढ़ेअति-आनंदआन।”
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“य: संपाठं पठत्येनं स स्यात्कल्याण-भाजनम्”
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“…े क्षमा माँगकर उनके प्रति बड़ी भक्ति प्रदर्शित की थी। ‘भक्तामर-स्तोत्र’ का पाठ समस्त विघ्न-बाधाओं का नाशक और सब प्रकार मंगलकारक माना जाता है। इसका प्रत्येक श्लोक मंत्र मानकर उसकी आराधना भी की जाती है”
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“श्री भक्तामर का पाठ, करो नित प्रात, भक्ति मन लार्इ”
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“…थ की प्रतिमा प्रकट हो गयी थी। इस स्तोत्र की अपूर्व-महिमा मानी गयी है। इसके पाठ और जाप से समस्त विघ्न-बाधायें दूर होती हैं तथा सुख-शांति मिलती है।”
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“…रम दूरकर सबको क्षमा करा दिया। इस स्तोत्र का श्रद्धा एवं पूर्ण मनोयोगपूर्वक पाठ करने से समस्त व्याधियाँ दूर होती हैं तथा सारी मनोकामनाएँ पूर्ण होती हैं।”
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