एकीभाव-स्तोत्र (भाषानुवाद)
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“गदगद सुर सों सुयश मंत्र पढ़ि पूजा ठानें”
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209 परिणाम “पूजा” के लिए
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“गदगद सुर सों सुयश मंत्र पढ़ि पूजा ठानें”
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“हे भद्र! आसन लोक-पूजा, संघ की संगति तथा,”
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“पूजा शास्त्र गुरुन की सेवा, संयम तप चहुँ दानी”
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“कार्तिक फाल्गुन साढ़ आठ दिन, सिद्धचक्र-पूजा,”
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“पूजा को गाऊँ हर्ष बढ़ाऊँ, खूब नचाऊँ प्रेम भरूँ”
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“अरिहंत श्रुत सिद्धांत गुरु निर्ग्रंथ नित पूजा रचूँ”
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“आनन्द से पूजा करें, वाँछा न पूजा की करें”
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“पूजा परम जिनराज चाहूँ, और देव न चहूँ कदा”
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“‘छठ’ छ: लेश्या के परिनाम, पूजा आदि करो षट्-काम”
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“पंच कल्याणक तीर्थंकर के अंतिम भव की पाँच अत्यन्त मंगल घटनाओं का क्रम है। पूजा, प्रतिष्ठा, कथा और तीर्थक्षेत्रों में इनका विशेष स्मरण होता है।”
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“जैन संघ में मुनि, आर्यिका, श्रावक और श्राविका सम्मिलित माने जाते हैं। गृहस्थ अनुयायी पूर्ण मुनि-व्रतों के स्थान पर अपनी क्षमता के अनुसार अणुव्रत, पूजा, स्वाध्याय, दान और संयम का अभ्यास करते हैं।”
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“…ेतु शिर नवाकर पवित्र जल, गन्ध, अक्षत, पुष्प, नैवेद्य, दीप, धूप तथा फलों से पूजा करता हूँ।”
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“ॐ ह्रीं भावपूजा भाववंदना त्रिकालपूजा त्रिकालवंदना करें करावें भावना भावें श्रीअरिहंतजी सिद्धजी आचार्यजी उपाध्यायजी सर्वसाधुजी पंच-परमेष्ठिभ्यो नम:, प्रथमानुयोग-करणानुयोग-चरणानुयोग-द्रव्यानुयोगेभ्यो नम:, दर्शनविशुद्ध्यादि-षोडशकारणेभ्यो नम:, उत्तमक्षमादि- दशलाक्…”
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“अष्ट द्रव्यमय अर्घ्य, प्रभुपद पूजा करें हम”
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“गुरु-आज्ञा से पूजा रचकर, ‘अरुणा’ मन में हर्षित है”
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“तिहुँलोक-भीतर सासते, सुर-असुर-नर पूजा करें”
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“…यी दीपकों द्वारा प्रकाश कर उत्सव मनाया तथा हर्ष-सूचक मोदक (नैवेद्य) आदि से पूजा की। तब से इन दोनों महान् आत्माओं की स्मृतिस्वरूप यह निर्वाणोत्सव समस्त भारतवर्ष में मनाया जाता है।”
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“…वेद्य, दीप, धूप, फल व अर्घ्य बनावें। बहियाँ, दवात, कलम आदि पास में रख लें। पूजा करने के लिये पूजकों को पूर्व या उत्तर-दिशा में मुख करके बैठना चाहिए। पूजा गृहस्थाचार्य द्वारा या स्वयं करनी चाहिए। सर्वप्रथम पूजन में बैठे हुए सभी सज्जनों को तिलक लगाना चाहिये। उस…”
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“करें हैं पूजा व, मन वचन काया करि नमें”
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“बहुविध पूजाकारक वही, सर्व शील पाले उन सही”
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“तीन-प्रदक्षिण दे सिर नायो, कर पूजा थुति कीनी”
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“नंदीश्वर-पूजा करें, ध्यावें आदि जिनंद”
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“मैना सती तब आपकी पूजा इलाज को”
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“तीर्थंकर भगवान के गर्भ, जन्म, दीक्षा, केवलज्ञान एवं निर्वाण इन पांच कल्याणकों के समय देवताओं द्वारा पूजा और प्रभावना की जाती है”
विवरण खोलें →ॐ जय! जय! जय! | नमोऽस्तु! नमोऽस्तु! नमोऽस्तु!| णमो अरिहंताणं, णमो सिद्धाणं, णमो आइरियाणं | णमो उवज्झायाणं, णमो लोए सव्वसाहूणं || ॐ ह्रीं अनादिमूलमंत्र...
विवरण खोलें →कविश्री हीराचंद (पूजन विधि निर्देश) (अडिल्ल छन्द) अष्ट-करम करि नष्ट अष्ट-गुण पाय के, अष्टम-वसुधा माँहिं विराजे जाय के | ऐसे सिद्ध अनंत महंत मनाय के, स...
विवरण खोलें →कवि श्री वृन्दावनदास (पूजन विधि निर्देश) (छन्द चौबोला) ऋषभ अजित संभव अभिनंदन, सुमति पदम सुपार्श्व जिनराय | चंद पुहुप शीतल श्रेयांस-जिन, वासुपूज्य पूजि...
विवरण खोलें →कविश्री बख्तावरसिंह (पूजन विधि निर्देश) (अडिल्ल छंद) सर्वारथ सुविमान त्याग गजपुर में आये | विश्वसेन भूपाल तासु के नंद कहाये || पंचम-चक्री भये मदन-द्वा...
विवरण खोलें →कवि श्री बख्तावरसिंह (पूजन विधि निर्देश) (गीता छन्द) वर स्वर्ग प्राणत सों विहाय सुमात वामा-सुत भये | अश्वसेन के पारस जिनेश्वर चरन जिनके सुर नये || नव-...
विवरण खोलें →कविश्री वृन्दावनदास (पूजन विधि निर्देश) (मत्त-गयंद छन्द) श्रीमत वीर हरें भव-पीर, भरें सुख-सीर अनाकुलताई | केहरि-अंक अरीकर-दंक, नयें हरि-पंकति-मौलि सुह...
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