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चौबीस तीर्थंकर: क्रम और दिगम्बर लांछन

JainSudha सम्पादकीय सार

वर्तमान अवसर्पिणी के चौबीस तीर्थंकरों और दिगम्बर परम्परा में प्रचलित लांछनों की संदर्भ-सूची।

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अहिंसा और अपरिग्रह: गृहस्थ जीवन में अभ्यास

JainSudha सम्पादकीय सार

अहिंसा और अपरिग्रह को भोजन, वाणी, उपभोग और दैनिक निर्णयों में लागू करने के व्यावहारिक संकेत।

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शुभ + लाभ

श्री ऋषभदेवाय नम: | श्री महावीराय नम: | श्री गौतम-गणधराय नम: | श्री केवलज्ञान-लक्ष्म्यै नम: | श्री जिन-सरस्वत्यै नम:। शरशभ मतकरतक कषण अमवसयवर नरवण सव...

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रत्नाकर पंचविंशतिका

श्री रत्नाकर सूरि विरचित स्तोत्र का हिन्दी पद्यानुवाद कविश्री रामचरित उपाध्याय शुभ-केलि के आनंद के धन के मनोहर धाम हो, नरनाथ से सुरनाथ से पूजित चरण ग...

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बारह भावना : वंदूँ श्री अरिहंतपद…

कविश्री मंगतराय (दोहा) वंदूँ श्री अरिहंतपद, वीतराग विज्ञान | वरणूँ बारह भावना, जग-जीवन-हित जान ||१|| (विष्णुपद छंद) कहाँ गये चक्री जिन जीता, भरतखंड सा...

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बारह भावना

कविश्री भूधर दासजी (अनित्य भावना) राजा राणा छत्रपति, हाथिन के असवार | मरना सबको एक दिन, अपनी-अपनी बार ||१|| (अशरण भावना) दल-बल देवी-देवता, मात-पिता-पर...

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मेरी-भावना

कविश्री जुगलकिशोर जिसने राग-द्वेष-कामादिक जीते, सब जग जान लिया | सब जीवों को मोक्षमार्ग का, निस्पृह हो उपदेश दिया || बुद्ध-वीर-जिन-हरि-हर-ब्रह्मा, या...

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दु:खहरण-विनती

कविश्री वृन्दावन दास (शैर की लय में तथा और रागिनियों में भी बनती है।) श्रीपति जिनवर करुणायतनं, दु:खहरन तुम्हारा बाना है | मत मेरी बार अबार करो, मोहि द...

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आत्म-कीर्तन

कविश्री मनोहरलाल वर्णी ‘सहजानंद’ हूँ स्वतंत्र निश्चल निष्काम, ज्ञाता-दृष्टा आतम-राम | मैं वह हूँ जो हैं भगवान्, जो मैं हूँ वह हैं भगवान् | अन्तर यही ऊ...

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इष्ट-प्रार्थना

भावना दिन-रात मेरी, सब सुखी संसार हो | सत्य-संयम-शील का, व्यवहार हर घर-बार हो || धर्म का परचार हो, अरु देश का उद्धार हो | और ये उजड़ा हुआ, भारत चमन गु...

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आत्म-रमण

कविश्री मनोहरलाल वर्णी ‘सहजानंद’ मैं दर्शन-ज्ञान-स्वरूपी हूँ, मैं सहजानंद-स्वरूपी हूँ | हूँ ज्ञानमात्र परभाव शून्य, हूँ सहज-ज्ञानघन स्वयंपूर्ण | हूँ स...

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तीर्थराज सम्मेदशिखर वंदना-क्रम

यहाँ से इस अवसर्पिणी-काल में भगवान् आदिनाथ जी, वासुपूज्य जी, नेमिनाथ जी एवं भगवान् महावीर स्वामी को छोड़कर शेष बीस तीर्थंकर मोक्ष पधारे हैं। इस वंदना...

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रस त्याग विचार

रस-त्याग के अभ्यास से हम अपनी जिव्हा इंद्रिय पर नियंत्रण कर सकते हैं | रविवार को – नमक (खारे पदार्थ) सोमवार को – हरे फल, सब्जियां मंगलवार को – मीठे पद...

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ग्यारह-प्रतिमा-व्रत क्रम

श्रावक की भूमिका में मोक्षमार्ग के अनुरूप आचरण करने के लिए ग्यारह प्रतिमा व्रतों का पालन करते हुए धर्म साधना करते है :- प्रथम: दर्शन प्रतिमा: धारक सा...

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