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चौबीस तीर्थंकर: क्रम और दिगम्बर लांछन
वर्तमान अवसर्पिणी के चौबीस तीर्थंकरों और दिगम्बर परम्परा में प्रचलित लांछनों की संदर्भ-सूची।
मूल पाठ
अक्षर आकार ऊपर से बदलेंतीर्थंकर वह जिन हैं जो केवलज्ञान के बाद चार प्रकार के संघ के लिए मोक्षमार्ग का तीर्थ स्थापित करते हैं। वर्तमान अवसर्पिणी काल में चौबीस तीर्थंकर माने जाते हैं। प्रतिमा की पहचान में लांछन सहायक होता है।
क्रम — तीर्थंकर — दिगम्बर परम्परा में प्रचलित लांछन
१. ऋषभदेव या आदिनाथ — बैल
२. अजितनाथ — हाथी
३. संभवनाथ — घोड़ा
४. अभिनंदननाथ — वानर
५. सुमतिनाथ — क्रौंच या कोक पक्षी
६. पद्मप्रभ — लाल कमल
७. सुपार्श्वनाथ — नन्द्यावर्त या स्वस्तिक
८. चन्द्रप्रभ — अर्धचन्द्र
९. पुष्पदन्त या सुविधिनाथ — मकर; कुछ सूचियों में केकड़ा
१०. शीतलनाथ — कल्पवृक्ष; कुछ परम्पराओं में श्रीवत्स
११. श्रेयांसनाथ — गैंडा
१२. वासुपूज्य — भैंसा
१३. विमलनाथ — वराह
१४. अनन्तनाथ — भालू
१५. धर्मनाथ — वज्र
१६. शांतिनाथ — हिरण
१७. कुन्थुनाथ — बकरा
१८. अरनाथ — मछली; कुछ सूचियों में पुष्प
१९. मल्लिनाथ — कलश
२०. मुनिसुव्रतनाथ — कछुआ
२१. नमिनाथ — नीलकमल
२२. नेमिनाथ — शंख
२३. पार्श्वनाथ — सर्प
२४. महावीर स्वामी — सिंह
लांछन-सूचियों में दिगम्बर और श्वेताम्बर परम्पराओं के बीच तथा कुछ क्षेत्रीय स्रोतों में सीमित भिन्नताएँ मिलती हैं। संग्रहालय, मंदिर या प्राचीन प्रतिमा की पहचान करते समय आसन, छत्र, सर्प-फण, लेख और अन्य चिह्न भी साथ देखने चाहिए।