अथ देव-शास्त्र-गुरु पूजा
मिलती हुई पंक्ति
“भिन्न भिन्न कहुँ आरती, अल्प सुगुण विस्तार”
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नाम याद न हो तो पाठ की कोई पंक्ति लिखें—हिन्दी, देवनागरी या Roman English में।
27 परिणाम “आरती” के लिए
मिलती हुई पंक्ति
“भिन्न भिन्न कहुँ आरती, अल्प सुगुण विस्तार”
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“श्रीजी के सन्मुख करत आरती मोह-तिमिर नासें दु:खदाय”
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“चाँदनपुर महावीर की, कहूँ आरती गाय”
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“तुव आरती तम वारती पाऊँ सुज्ञान प्रकाश मैं”
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“चाँदनपुर महावीर की, कहूँ आरती गाय”
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“कर आरती गुरु की हटाऊँ, मोह-तम की यह बला”
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“पंच-मेरु की आरती, पढ़े सुने जो कोय”
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“कहूँ आरती भारती, हम पर होहु सहाय”
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“उनतिस-अंग की आरती, सुनो भविक चित लाय”
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“फिर करत आरती शुद्धभाव, जिनराज सभी लख हर्ष आव”
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“(इसके पश्चात् खड़े होकर आरती करें)”
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“आरती श्रीजिनराज तिहारी, करम दलन संतन हितकारी”
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“महाराज की श्रीजिनराज की, दीनदयाल की आरती की जय”
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“जगमग जगमग आरती कीजे, आदीश्वर भगवान् की”
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“आरती शब्द का अर्थ :निरंजन, मनोरथ, कामना, इच्छा, विनती”
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“सुर नर मुनि गुण गाएँ -2, आरती कर थारी”
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“करूं आरती वर्द्धमान की,पावापुर निरवान थान की”
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“आरती लेने का पद”
पढ़ें →आर्यिका चन्दनामती
भगवान शांतिनाथ की सम्पूर्ण हिन्दी आरती, स्वच्छ और पंक्तिबद्ध रूप में।
पढ़ें →ओं जय सन्मति-देवा, प्रभु जय सन्मति-देवा | वीर महा-अतिवीर, प्रभु जी वर्द्धमान-देवा || ओं जय सन्मति देवा ! त्रिशला-उर अवतार लिया, प्रभु सुर-नर हरषाये |...
पढ़ें →कविश्री द्यानतराय (चौपार्इ) इह विधि मंगल आरति कीजे, पंच परमपद भज सुख लीजे | इह विधि मंगल आरति कीजे, पंच परमपद भज सुख लीजे पहली आरति श्रीजिनराजा, भव दध...
पढ़ें →म्हारा चंद्रप्रभ जी की सुन्दर मूरत, म्हारे मन भार्इ जी || म्हारे मन भार्इ जी, म्हारे मन भार्इ जी | म्हारा चंद्रप्रभ जी की सुन्दर मूरत, म्हारे मन भार्इ...
पढ़ें →ॐ जय पारस देवा, स्वामी जय पारस देवा | सुर नर मुनिजन तुम चरणन की, करते नित सेवा | पौष वदी ग्यारस काशी में, आनंद अतिभारी-2, अश्वसेन वामा माता उर-2, लीनो...
पढ़ें →ॐ जय सन्मति देवा, प्रभु! जय सन्मति देवा | वर्द्धमान महावीर वीर अति-2, जय संकट छेवा || ॐ जय सन्मति देवा || सिद्धारथ नृप नंद दुलारे, त्रिशला के जाये-2 |...
पढ़ें →जय महावीर प्रभो, स्वामी जय महावीर प्रभो | कुंडलपुर अवतारी-2, त्रिशलानंद विभो || ॐ जय महावीर प्रभो || सिद्धारथ घर जन्मे, वैभव था भारी-2, बाल ब्रह्मचारी...
पढ़ें →ॐ जय पारस देवा, स्वामी जय पारस देवा | आरति हम सब करते-2, मिले मुक्ति मेवा || बड़ागांव टीले से, स्वप्न दिया तुमने-2 | चमत्कार कर प्रगटे-2, शरण लही हमने...
पढ़ें →कवि पं. मक्खनलाल जय सिद्धचक्र देवा, जय सिद्धचक्र देवा | करत तुम्हारी निश-दिन, मन से सुर-नर-मुनि सेवा | जय सिद्धचक्र देवा | ज्ञानावरणी दर्शनावरणी मोह अ...
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