समस्त जैन अर्घ्यावली — महार्घ्य, शांतिपाठ एवं विसर्जन
परंपरागत दिगम्बर जैन पूजा-पाठ
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“॥ 49. शांतिपाठ ॥”
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111 परिणाम “पाठ” के लिए
परंपरागत दिगम्बर जैन पूजा-पाठ
मिलती हुई पंक्ति
“॥ 49. शांतिपाठ ॥”
विवरण खोलें →कविश्री चंद्र
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“नित चालीसहिं बार, पाठ करे चालीस दिन।”
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“श्री पद्मप्रभु देव का, यह चालीसा पाठ।”
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“उनकी ही मिली प्रेरणा तब ही, पाठ लिखा है यह मैंने।”
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“श्री नमिनाथ जिनेश का, यह चालीसा पाठ।”
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“श्रीमुनिसुव्रतनाथ का, यह चालीसा पाठ।”
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“मल्लिनाथ भगवान के, चालीसा का पाठ।”
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“इनके ही गुणगान में, यह चालीसा पाठ।”
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“कुन्थुनाथ भगवान का, यह चालीसा पाठ।”
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“उनकी ही मिली प्रेरणा तब, मैंने यह लिखा है चालीसा। इस पाठ के द्वारा धर्म की वर्षा, करो यही है मम इच्छा।। यह धर्म सदा मंगलमय है, इससे ही आगे बढ़ना है। जग के सुख-वैभव भोग पुन:, आध्यात्मिक लक्ष्मी वरना है।।२।।”
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“पूरा होवे शीघ्र ही, यह चालीसा पाठ।।३।।”
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“लिखने का साहस करूँ, यह चालीसा पाठ।।२।।”
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“वासुपूज्य जिनराज का, यह चालीसा पाठ।”
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“श्री शीतल जिनराज का, यह चालीसा पाठ।”
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“-विसर्जन पाठ-”
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“पुष्पदंत भगवान के, चालीसा का पाठ।”
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“श्री सुपार्श्व जिनराज का, यह चालीसा पाठ।”
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“तब मैं पूरा कर सकूं, यह चालीसा पाठ।।३।।”
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“चालीसा के पाठ से, करूँ प्रभू गुणगान।।३।।”
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“चालीस दिन तक जो पढ़े, यह चालीसा पाठ।”
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“सूरी पाठक साधुगण, हैं जग के आधार।।१।।”
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“बस गुरु कृपा के कारण ही, मैंने यह पाठ लिखा भव्यों!”
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“बाइसवें तीर्थेश के, चालीसा का पाठ।”
विवरण खोलें →महाकवि धनपाल
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“पाठ-सूचना”
विवरण खोलें →कवि भूपाल
मिलती हुई पंक्ति
“पाठ-सूचना”
विवरण खोलें →देवनन्दि
मिलती हुई पंक्ति
“पाठ-सूचना”
विवरण खोलें →आचार्य वादिराज
मिलती हुई पंक्ति
“पाठ-सूचना”
विवरण खोलें →महाकवि धनञ्जय
मिलती हुई पंक्ति
“पाठ-सूचना”
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“पूजा प्रारम्भ करते समय नौ बार णमोकार मंत्र पढ़कर, विनय पाठ और मंगल पाठ बोलकर पूजा प्रारम्भ करनी चाहिए”
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“३३.वचनबल ऋद्धि- जीभ, कंठ आदि में शुष्कता एवं थकावट हुए बिना सम्पूर्ण श्रुत का अन्तर्मूहुर्त में ही पाठ कर सकने की शक्ति ।”
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