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15. भगवान धर्मनाथ चालीसा

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“उनकी ही मिली प्रेरणा तब, मैंने यह लिखा है चालीसा। इस पाठ के द्वारा धर्म की वर्षा, करो यही है मम इच्छा।। यह धर्म सदा मंगलमय है, इससे ही आगे बढ़ना है। जग के सुख-वैभव भोग पुन:, आध्यात्मिक लक्ष्मी वरना है।।२।।”

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विनयपाठ

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“पूजा प्रारम्भ करते समय नौ बार णमोकार मंत्र पढ़कर, विनय पाठ और मंगल पाठ बोलकर पूजा प्रारम्भ करनी चाहिए”

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पाठ संग्रह
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अथ परमर्षि स्वस्ति मंगल विधान

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“३३.वचनबल ऋद्धि- जीभ, कंठ आदि में शुष्कता एवं थकावट हुए बिना सम्पूर्ण श्रुत का अन्तर्मूहुर्त में ही पाठ कर सकने की शक्ति ।”

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पूजा संग्रह
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