पठन सामग्री
दिगम्बर सिद्धान्त और ग्रंथ-परम्परा
षट्खण्डागम, कषायप्राभृत और चार अनुयोगों के माध्यम से दिगम्बर ग्रंथ-परम्परा का संक्षिप्त मानचित्र।
मूल पाठ
अक्षर आकार ऊपर से बदलेंदिगम्बर परम्परा मानती है कि प्राचीन मूल अंग-ग्रंथ कालक्रम में पूर्ण रूप से सुरक्षित नहीं रहे। फिर भी पूर्व-परम्परा के अंश और सिद्धान्त अनेक प्राचीन ग्रंथों, भाष्यों और अनुयोग-साहित्य में संरक्षित माने जाते हैं।
प्रमुख आरम्भिक ग्रंथ
• षट्खण्डागम — कर्म-सिद्धान्त का अत्यन्त विस्तृत और तकनीकी विवेचन।
• कषायप्राभृत — क्रोध, मान, माया और लोभ जैसी कषायों तथा उनके आध्यात्मिक प्रभाव का अध्ययन।
चार अनुयोग
• प्रथमानुयोग — महापुरुषों, तीर्थंकरों और धार्मिक कथाओं के माध्यम से आदर्श जीवन का वर्णन।
• करणानुयोग — लोक, काल, जीव-स्थान, कर्म-गणना और जैन ब्रह्माण्ड-विज्ञान।
• चरणानुयोग — मुनि और श्रावक के आचार, व्रत, संयम और साधना।
• द्रव्यानुयोग — आत्मा, द्रव्य, तत्त्व, नय, ज्ञान और मोक्षमार्ग का दार्शनिक विवेचन।
अध्ययन का सही तरीका
किसी ग्रंथ का केवल नाम, अनुवाद या एक उद्धरण सम्पूर्ण मत को नहीं दर्शाता। मूल भाषा, टीका-परम्परा, संस्करण, लेखक और सम्प्रदायगत व्याख्या को साथ देखना चाहिए। JainSudha पर उपलब्ध PDF को स्रोत-सूची की तरह उपयोग करें; धार्मिक निष्कर्ष से पहले प्रमाणित संस्करण या ज्ञानी आचार्य से मिलान करना उचित है।