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“… में लीन थे। कुछ द्वेषी-व्यक्तियों ने उन्हें कुष्ट-ग्रस्त देखकर राजसभा में जैन मुनियों का उपहास किया, जिसे जैनधर्म प्रेमी राजश्रेष्ठी सहन न कर सके और भावावेश में कह उठे कि हमारे मुनिराज की काया तो स्वर्ण जैसी सुन्दर होती है। राजा ने अगले दिन मुनिराज के दर्शन क…”
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“‘द्यानत’ यह गति होय हमारी, जैनधर्म जयवंतो”
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“राजसभा में मान बढ़ाया, जैनधर्म जग में फैलाया ।”
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“जैन धर्म की ध्वजा धरा पर, आदिकाल से फहरायी ।”
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“पार्श्वनाथ का दर्शन पाया, सबने जैन-धरम अपनाया ।।१३।।”
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“जैन दर्शन कर्म को केवल भाग्य या नैतिक हिसाब नहीं, बल्कि आत्मा से बंधने वाले सूक्ष्म पुद्गल के रूप में समझाता है। मन, वचन और काय की गतिविधि तथा कषाय कर्म-सम्बन्ध को प्रभावित करते हैं।”
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“जैन दर्शन में द्रव्य वह है जिसमें गुण और पर्याय होते हैं। विश्व को छह मूल द्रव्यों से समझाया जाता है।”
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“जैन दर्शन में सात तत्त्व संसार, कर्म और मुक्ति की प्रक्रिया को समझने का आधार देते हैं।”
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“• करणानुयोग — लोक, काल, जीव-स्थान, कर्म-गणना और जैन ब्रह्माण्ड-विज्ञान।”
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“दिगम्बर जैन परम्परा जैन धर्म की दो प्रमुख परम्पराओं में से एक है। संस्कृत में दिक् का अर्थ दिशा और अम्बर का अर्थ वस्त्र है; इसलिए दिगम्बर का भावार्थ दिशाओं को वस्त्र मानने वाला या आकाश-वस्त्रधारी है। यह नाम मुख्यतः पूर्ण दिगम्बर मुनियों के कठोर अपरिग्रह से जुड…”
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“(यह ‘ओ3म्’ इसप्रकार भी लिखा पाया जाता है, जो कि जैन परम्परा सम्मत नहीं है।)”
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“…लाश चंपापुर पावापुर गिरनार सोनागिर मथुरा तारंगा आदि सिद्धक्षेत्रेभ्यो नम:, जैनबद्री मूडबिद्री देवगढ़ चन्देरी पपौरा हस्तिनापुर अयोध्या राजगृही चमत्कारजी श्रीमहावीरजी पद्मपुरी तिजारा बड़ागांव आदि अतिशयक्षेत्रेभ्यो नम:, श्री चारणऋद्धिधारी सप्तपरमषिऋभ्यो नम:, ओं ह…”
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“कवियत्री अरुणा जैन ‘भारती’”
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“-पं. नाथूलालजी जैन ‘शास्त्री’”
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“मंगलं कुंदकुंदाद्यो, जैनधर्मोऽस्तु मंगलम्”
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“भविजन-कुमुदचंद सुखदैन, सुर-नरनाथ प्रमुख-जग जैन”
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“रथ जैन का तेरा चले पीछे यों बताया”
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“मंगलं कुंदकुंदाद्यो, जैनधर्मोऽस्तु मंगलम्”
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“सोनागिरि – ग्वालियर-झाँसी रेल मार्गपर ‘सोनागिरि’ स्टेशन से 3 कि.मी. दूर श्रमणाचल-पर्वत है। पहाड़ पर 77 दिगम्बर जैन मंदिर हैं। यहाँ से नंगकुमार, अनंगकुमार सहित साढ़े पाँच करोड़ मुनि मोक्ष गए हैं ।”
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“जैनदर्शन के अनुसार लोक-रचना अनादि-अनिधन है। इसका कोर्इ आदि अंत नहीं है, स्वयंसिद्ध अर्थात् अकृत्रिम है, जिसमें ९५% रचना शाश्वत (अपरिवर्तनशील) है। अधोलोक एवं ऊर्ध्वलोक की रचना में कोर्इ परिवर्तन नहीं होता। मध्यलोक में भी केवल जम्बू, धातकी एवं पुष्करार्ध द्वीपों…”
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“विश्व के धर्मों में ‘जैनधर्म’ प्राचीनतम धर्म है”
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“जिन शासन में जैनाचार्यों ने लिखा है कि वस्त्रधारी मनुष्य मुक्ति नहीं पा सकता है; चाहे वह कोई हो, मुनिदीक्षा लेकर ही मुक्ति की प्राप्ति कर सकते हैं”
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(वीर निर्वाण संवत के क्रम से) १. कार्तिक कृष्ण १५ अमावस्या को प्रात: –> भ. महावीर निर्वाणोत्सव २. कार्तिक शुक्ल ८ से पूर्णिमा तक –> अष्टाह्निका पर्व -...
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फल:- आम, अनार, आड़ू, अनानास, अमरूद, आँवला, अलूचा, अंगूर, बेर, बेलगिरि, सेब, संतरा, सिंघाड़ा, शरीफा, केला, ककड़ी, कमरख, खरबूजा, खीरा, गन्ना, र्इख, गोला...
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आचार्य उमास्वामी (उमास्वाति)
आचार्य उमास्वामी (उमास्वाति) विरचित तत्त्वार्थसूत्र के दस अध्यायों का पूर्ण, अनुभागबद्ध और खोजयोग्य संस्कृत पाठ।
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कविश्री चंद्र
कविश्री चंद्र रचित श्री पद्मप्रभ भगवान चालीसा का स्वच्छ, पंक्तिबद्ध और साइट पर पढ़ने योग्य लोकप्रिय हिन्दी पाठ।
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भगवान पद्मप्रभु की विस्तृत चालीसा का वैकल्पिक हिन्दी पाठ; लोकप्रिय कविश्री चंद्र पाठ से यह स्वतंत्र रचना है।
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आर्यिका चन्दनामती
भगवान शांतिनाथ की सम्पूर्ण हिन्दी आरती, स्वच्छ और पंक्तिबद्ध रूप में।
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भगवान महावीर चालीसा का पूर्ण, स्वच्छ और पंक्तिबद्ध हिन्दी पाठ।
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भगवान पार्श्वनाथ चालीसा का पूर्ण, स्वच्छ और पंक्तिबद्ध हिन्दी पाठ।
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