चौबीस तीर्थंकर निर्वाणभूमि चालीसा
मिलती हुई पंक्ति
“चौबीस तीर्थंकर नमूँ, नमूँ सिद्ध भगवान”
विवरण खोलें →पूरा डिजिटल संग्रह
नाम याद न हो तो पाठ की कोई पंक्ति लिखें—हिन्दी, देवनागरी या Roman English में।
190 परिणाम “णमोकार” के लिए
मिलती हुई पंक्ति
“चौबीस तीर्थंकर नमूँ, नमूँ सिद्ध भगवान”
विवरण खोलें →मिलती हुई पंक्ति
“जन्में यहाँ अनंतों जिनवर, पूज्य धरा यह सर्वहितंकर”
विवरण खोलें →मिलती हुई पंक्ति
“बाकी के इक्किस तीर्थंकर, खड्गासन से पहुँचे शिवपुर।।२७।।”
विवरण खोलें →मिलती हुई पंक्ति
“वे थीं तीर्थंकर की माता, जिन्हें नमावें देव भी माथा।।४।।”
विवरण खोलें →महाकवि धनपाल
मिलती हुई पंक्ति
“मोहतिमिरौधदिनकर नगर गुणगणानां पौरागाम् ॥]”
विवरण खोलें →कवि भूपाल
मिलती हुई पंक्ति
“वाग्देवीरतिकेतनं जयरमाक्रीडानिधानं महत् ।”
विवरण खोलें →देवनन्दि
मिलती हुई पंक्ति
“येन स्मरास्त्रनिकरैरपराजितेन”
विवरण खोलें →आचार्य वादिराज
मिलती हुई पंक्ति
“स्तत्किं चित्रं जिन वपुरिदं यत्सुवर्णीकरोषि ॥ ४ ॥”
विवरण खोलें →महाकवि धनञ्जय
मिलती हुई पंक्ति
“नानार्थमेकार्थमदस्त्वदुक्तं हितं वचस्ते निशमय्य वक्तुः ।”
विवरण खोलें →मिलती हुई पंक्ति
“।।इति श्रीचतुर्विंशति–तीर्थंकर स्वस्ति मंगलविधानं पुष्पांजलिं क्षिपामि।।”
विवरण खोलें →मिलती हुई पंक्ति
“जंघाऽनल-श्रेणि-फलांबु-तंतु-प्रसून-बीजांकुर-चारणाह्वा:”
विवरण खोलें →मिलती हुई पंक्ति
“सुरपति उरग नरनाथ तिनकरि वंदनीक सुपद-प्रभा”
विवरण खोलें →मिलती हुई पंक्ति
“ॐ ह्रीं पंचभरत, पंचऐरावत, दशक्षेत्रविषयेषु त्रिंशति चतुर्विंशतीनां विंशति अधिकसप्तशत तीर्थंकरेभ्य: नम: अर्घ्यं निर्वपामीति स्वाहा”
विवरण खोलें →मिलती हुई पंक्ति
“द्वीप अढ़ाई मेरु पन, सब तीर्थंकर बीस”
विवरण खोलें →मिलती हुई पंक्ति
“अर्थ:- शोभायुक्त और नमस्कार करते हुए देवेन्द्रों और असुरेन्द्रों के मुकुटों के चमकदार रत्नों की कान्ति से जिनके श्रीचरणों के नखरूपी चन्द्रमा की ज्योति स्फुरायमान हो रही है, जो प्रवचनरूप सागर के लिए स्थायी चन्द्रमा हैं एवं योगीजन जिनकी स्तुति करते रहते हैं, ऐसे…”
विवरण खोलें →मिलती हुई पंक्ति
“जन्म-जन्मकृतं पापं, दर्शनेन विनश्यति”
विवरण खोलें →मिलती हुई पंक्ति
“गनिये अठारह दोष तिनकरि रहित देव निरंजनो”
विवरण खोलें →मिलती हुई पंक्ति
“ता पर वारिज रच्यो प्रभा दिनकर छिपै”
विवरण खोलें →मिलती हुई पंक्ति
“अंत:पत्र-तटेष्वनाहत-युतं ह्रींकार-संवेष्टितम्”
विवरण खोलें →मिलती हुई पंक्ति
“यश्चिन्तामणि-शुद्ध-भाव-परमं ज्ञानात्मकैरर्चयेत्,”
विवरण खोलें →मिलती हुई पंक्ति
“तुष-खंड निकारे जल सु-पखारे, पुंज तुम्हारे ढिंग धारे”
विवरण खोलें →मिलती हुई पंक्ति
“जबै जानकी राम ने जो निकारी,”
विवरण खोलें →मिलती हुई पंक्ति
“अनुक्रमसों शिव लहे, ’रत्न’ इमि कहें पुकारे”
विवरण खोलें →मिलती हुई पंक्ति
“यह विरद सुनकर शरण आयो, कृपा कीज्यो नाथजी”
विवरण खोलें →मिलती हुई पंक्ति
“जिन-पूजा तें स्वर्ग-विमान, अनुक्रम तें पावें निर्वाण”
विवरण खोलें →मिलती हुई पंक्ति
“ॐ ह्रीं फाल्गुनकृष्ण-एकादश्यां केवलज्ञान-मंडिताय श्री आदिनाथजिनेन्द्राय अर्घ्यं निर्वपामीति स्वाहा।४।”
विवरण खोलें →मिलती हुई पंक्ति
“जब प्रथम तीर्थंकर ऋषभ की, सृष्टि में जय-जय-जय हुर्इ”
विवरण खोलें →मिलती हुई पंक्ति
“ॐ ह्रीं फाल्गुनकृष्ण-चतुर्थ्यां मोक्षमंगल-प्राप्ताय श्रीपद्मप्रभजिनेन्द्राय अर्घ्यं निर्वपामीति स्वाहा ।५।”
विवरण खोलें →मिलती हुई पंक्ति
“यह क्षुधा मिटाने को प्रभुवर, नैवेद्य बनाकर लाया हूँ”
विवरण खोलें →मिलती हुई पंक्ति
“भव-भव निज पर उपकार किया, तीर्थंकर पुण्य सँजोया था”
विवरण खोलें →